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तांगे वाला बना आज का अरबपति

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प लोगों के आसपास ऐसे बहुत से उदाहरण होंगे जो कुछ करने, कुछ बनने की चाह तो रखते हैं, लेकिन उनसे थोड़ी सी भी नाकामयाबी देखी नही जाती l जरा सा संघर्ष आया और टूट जाते हैं, लेकिन सोचिए एक ऐसा इंसान जिसने बहुत कुछ खोया, घर, जमीन, जमा-जमाया कारोबार, यहाँ तक कि वो मिट्टी भी जहाँ उसने जन्म लिया था l इतना सब कुछ होने के बाद भी उस इंसान ने हार नही मानी और ज़िन्दगी की सारी परेशानियों से लड़ते हुए कुछ कर दिखाया, कि आज पूरी दुनिया में उसका नाम है l

आज हम आपको एक ऐसे भारतीय की कहानी सुनाने जा रहे हैं, जिसने पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवाया है, और हिंदुस्तान का नाम ऊँचा किया है l हम बात कर रहे हैं MDH के मालिक महाशय धरमपाल हट्ठी जी की l धरमपाल हट्टी को हम मसाला किंग नाम से भी जानते हैं l महाशय धरमपाल हट्टी जी के मसाले आज दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं l “महाशियाँ दी हट्टी (MDH)” की दुनिया भर में 1000 से ज्यादा थोक और 4 लाख से ज्यादा रिटेल डीलर्स हैं l यही नही आज की तारीख में MDH के 50 से भी ज्यादा प्रोडक्ट हैं, जो कि 140 से ज्यादा पैकटो में उपलब्ध है l

धरमपाल हट्टी का जन्म 27 मार्च 1923 में सियालकोट में हुआ था(अब पाकिस्तान में हैं) l इनके पिता चुन्नीलाल सियालकोट के बाजार पंसारिया में मिर्च मसाले की दुकान चलाते थे | जिसका नाम था “महाशियाँ दी हट्टी “, जो आज MDH के नाम से पूरी दुनिया भर में मशहूर है lआखिर कैसे धरमपाल हट्टी मसालों के बादशाह बन गये, आखिर कैसे दर-दर भटकने वाला इंसान बन गया अरबपति, इसके पीछे एक संघर्ष भरी कहानी है l

5वीं कक्षा में फेल होने जाने के कारण इनके पिता जी ने इनकी पढ़ाई छुड़वाकर एक बढ़ई की दुकान पर काम सीखने के लिए लगा दिया, लेकिन इनका मन यहाँ भी नही लगा l 15 साल होने तक धरमपाल जी 50 काम बदल चुके थे, लेकिन कहीं टिक नही रहे थे, कि जिससे जिंदगी में कुछ कर सके l सियालकोट में मिर्च की प्रसिद्ध दुकान होने के नाते इनके पिता जी ने इन्हें मसालों की दुकान करा दी l मसालों के व्यापार में धरमपाल जम चुके थे, और अच्छा मुनाफा भी होने लगा था l

इन सब के बीच 1947 का वो दौर जब हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बंटवारे की आग में सब कुछ तहस नहस हो गया l धरमपाल को अपना सब कुछ जमा-जमाया कारोबार छोड़कर परिवार के साथ अमृतसर आना पड़ा l यहाँ आने के बाद इस परिवार के सामने बहुत सारी चुनौतीयाँ थी lकभी कभी खाने को नही होता था, और नई जगह होने के नाते भूखा भी सोना पड़ता था l अब धरमपाल के सामने रोजी-रोटी कमाने के लिए एक चुनौती थी l ना ही पुराना कारोबार था, और ना ही पूंजी, लेकिन इन सबके बावजूद इन्होने हार नही मानी l

 

कुछ करने के लिए ये दिल्ली के करोलबाग आये, और यहाँ आने के बाद कुछ पैसे जुटाकर तांगा और घोड़ा खरीद लिया, और इस तरीके से तांगा चलाकर परिवार का भरण-पोषण करने लगे lलेकिन कहते हैं ना कि किस्मत को जो मंजूर होता है वही होता है, इसलिए कुछ दिन के बाद इन्होनें ये काम भी छोड़ दिया l अब वो बाज़ार से मसाला खरीद कर लाते, और घर पर ही उसे कूटते और बेचते थे l धीरे धीरे इनकी मेहनत और ईमानदारी रंग लायी, इनके मसालों की शुद्धता लोगों के बीच प्रसिद्ध होने लगी, और इनका कारोबार चल निकला l

दूसरे लोग जो मसालों में मिलावट करते थे, उन्हें देखकर धरमपाल जी को बहुत बुरा लगा, उस दिन से उन्होंने खुद की मसाला पीसने की फैक्ट्री लगाने की सोची l बस फिर क्या था, धरमपाल के दृढ़ निश्चय और कठिन परिश्रम से उन्हें सफलता मिलती गयी, और उनका करोबार दिल्ली के कीर्तिनगर से निकलकर देश-विदेशों तक फ़ैल गया l जिसके बाद से ‘महाशय दी हट्टी’ “MDH”के नाम से मशहूर हो गया l

धरमपाल जी धर्म-कर्म के काम भी खूब करते हैं l जिसमे गरीबों को दान और गाय माता की सेवा जैसे कार्य शामिल है l धरमपाल जी हर रोज अपने घर हवन भी करते हैं, वे बताते है की, ये उन्होंने अपने पिता जी से सीखा है l वैसे महाशय जी तो 5वीं क्लास फेल हैं, लेकिन उनके द्वारा कई स्कूल चलाये जा रहे हैं, जिसमें हज़ारो बच्चे पढ़कर अपने भविष्य के सपने बुन रहे हैं l उनके द्वारा कई सारे अस्पताल, गौशाला, आश्रम चलाये भी जा रहे हैं l

लगभग 94 साल के धरमपाल जी की सेहत से काफी स्वस्थ हैं, और अपनी सेहत पर काफी ध्यान देते हैं l इनकी फिटनेस को देखते हुए लोगों ने इन पर कुछ जोक्स भी बनायें है, जो काफी शेयर किये जाये हैं l इनकी उम्र को लेकर कहा जाता है कि भीष्म पितामह के बाद इन्हीं को इछामृत्यु का वरदान प्राप्त है l एक और मजाक में कहा गया कि देश में अगर कुछ है जो नही बदला तो वो है, पारले-जी और MDH के मालिक उम्र l

वैसे जितनी आसानी से धरमपाल जी के संघर्ष की कहानी लिखी गयी, और जितने कम समय में आपने पढ़ा, इतनी आसान नही है, धरमपाल जी के कामयाबी की कहानी l जिन हालातों से गुजरकर धरमपाल जी ने मसालों का व्यापार शुरू किया, और पूरे दुनिया में अपनी कामयाबी की गाथा लिखी, उसे आप महसूस करेंगे तो आपको अंदाजा होगा कि महाशय धरमपाल हट्टी जी ने कितनी मेहनत की होगी इस मुकाम को पाने के लिए l

धरमपाल जी की कामयाबी का किस्सा एक प्रेरणादायक उदाहरण है, उन लोगों के लिए, जो जिंदगी में कुछ करना चाहते है, लेकिन अपने हालातों से मजबूर हैं, और जिंदगी में जीने की जद्दोजेहद में लगे हुए हैं l धरमपाल जी ने साबित कर दिखाया कि जिंदगी में हालातों के आगे घुटने नही टेकने चाहिए, जैसे भी हो आगे बढ़ते रहना चाहिए, अच्छे और सच्चे मन से किया परिश्रम जरूर रंग लाता है, बस धैर्य रखने की जरूरत है l इसलिए हम आपसे कहते हैं, कि निराश नही होना चाहिए, आपको खुद पर यकीन रखना होगा, और फिर हर कामयाबी आपके कदम चूमेगी l

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