‘हाँ मै भी हूँ अटल’ – अटल जी को एक श्रद्धांजलि

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मित्रों तीन चार दिन से अटल जी के निधन की खबर के साथ जहाँ भी जाओ दोस्तों में उठो -बैठो सिर्फ एक अटल चर्चा ही व्याप्त है. यहाँ तक कि उनकी कवितायेँ, कहानिया टीवी, अखबार, और सोशल मीडिया के #टैग पर अटल जी की किवदंतियां देखते सुनते यकायक जब एक पल के लिए तनहा हुआ तो एक कुछ शब्दों की एक लाइन मेरे जुबान पर आ गई – “हाँ मै भी हूँ अटल” ।

यह सुन कर पाहिले तो अपने आप से चकित हो बैठा लेकिन इस लाइन को मै अनसुना करते हुए अपने काम में लग गया. तभी मै पाता हूँ की वो लाइन मेरा पीछा करते हुए मेरे स्मृति पटल पर घूम रही है. और उसकी गूंज मुझे अपना काम नहीं करने दे रही है।

मेरी अटल जी को एक श्रद्धांजलि इस रचना के साथ जिसे 19 / 8 /18 अर्थात अभी कुछ समय पाहिले ही लिखा हूँ – “हाँ मै भी हूँ अटल”

अंततः हमने फैसला किया की चलो अब इसे शब्दों का अमली जामा पहना कर पूर्ण ही कर दिया जाय और जब पूर्ण करने बैठा तो देख रहा हूँ शब्दों की धारा मेरे मुंह से बहती ही जा रही है और जब पूरे शब्द दिल से निकल गए तो मेरे मन में एक अद्भुत शांति का एहसास हुआ और जिस रचना का निर्माण हुआ वो आपके सामने है…………..

हाँ मै भी हूँ अटल
और इस बात पर हूँ अटल
कि सत्य है अटल
अनंत है अटल
और अनंत समय के भारत में हैं अटल
वो जो लोग देख रहे है अटल दरबार
टीवी, सोशल माडिया और अख़बार
हर जगह #टैग पर है अटल कहानियां
यह पढ़ सुन कर चढ़ गया मुझ पर अटल रंग
हाँ मै भी हूँ अटल
और इस बात पर हूँ अटल
कि सत्य है अटल
और जहाँ सत्य है वहां हैं अटल
हर भारतवासी में बसे रहेंगे अटल
अमर रहेंगे अटल
सत्य पर रहेंगे अटल
और इस बात पर हूँ अटल
हाँ मै भी हूँ अटल

तो मित्रों आपको एक सच्चाई और बता दूँ कि न मै कोई कवि हूँ और न मुझे कविता लिखनी आती है। और न ही इस कविता को लिखने के बाद पढने की धुन बना पा रहा हूँ की इसे किस धुन में पढूं। और अगर आपको लगता है कि इसमे कुछ परिवर्तन होना चाहिए तो कमेन्ट में लिखें।