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क्या आप जानते है इंटरनेट का मालिक कौन है ?

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ज पुरे विश्व में संचालित इन्टरनेट में लगभग 100 से अधिक भाषाओं में कार्य किया जाता है हर देश की अलग भाषा होती है और भारत जैसे देश में तो कई भाषाओं में काम किया जाता है। दुनिया में जहाँ सबसे अधिक 26 प्रतिशत इंग्लिश व 20 प्रतिशत चीनी भाषा का इस्तेमाल इन्टरनेट में किया जाता है वही शेष अन्य भाषाओं का उपयोग किया जाता है। ऐसे में ये तथ्य बड़ा ही रोचक हो जाता है कि किस देश की सरकार द्वारा इन्टरनेट के स्टैंडर्ड्स तय किये जाते है या कोई अंतरराष्ट्रीय कम्पनी द्वारा ये काम किया जा रहा है।

बहुत से लोग ये सोचते है कि हम इन्टरनेट पर विभिन्न देशो से सेटेलाईट के माध्यम से जुड़े रहते है पर ये सही नहीं है दुनिया में इन्टरनेट पर डाटा ट्रांसफर का सिर्फ एक प्रतिशत कार्य सेटेलाईट से होता है जबकि 99 प्रतिशत कार्य हाई फाइबर ऑप्टिक केबिल के द्वारा होता है जिसे सबमैरीन केबिल भी कहा जाता है। क्योंकि ये समुद्र के अन्दर से गुजरती है पुरे विश्व में इनकी संख्या लगभग 450 है जिनकी कुल लम्बाई लगभग 1.1 मिलियन किमी है।

अब ये समझते है कि कैसे और कौन इन केबिलों को बिछाता है इसकी व्यस्था के लिए तीन लेवल की कंपनियां होती है टियर -1 टियर- 2 और टियर- 3, टियर 1 वो कंपनिया है जो अपना पैसा लगाकर समुद्र में केबिल बिछाती है ये कम्पनियां है एटी एंड टी, टाटा कम्युनिकेशन, एन0टी0टी0, डोकोमो आदि।

इसके बाद आती है टियर 2 यानि जो टियर1 से डाटा लेकर स्वयं इन्टरनेट सर्विस देती है या टियर 3 को डाटा उपलब्ध कराती है। इनमें मुख्य है भारती एयरटेल, बीएसएनएल,रिलाइंस आदि और टियर 3 में वे कम्पनियां आती है जो टियर 2 से डाटा लेकर इन्टरनेट सर्विस देती है।

ये सबमेरीन केबल जिन शहरों से जुड़ीं है उन्हें लेंडिंग स्टेशन कहते है इनमे भारत में मुंबई, कोचीन, चेन्नई प्रमुख लेंडिंग स्टेशन है इन स्टेशनों से डाटा अन्य शहरों में जाकर सामान्य यूजर्स तक पहुचता है।

इस प्रकार हम देखते है की टियर 3 कम्पनी हमें अर्थात सामान्य यूजर्स को सर्विस देती है और हमसे डाटा चार्ज लेकर अपना कमीशन काट कर टियर 2 को देती है इसी प्रकार टियर 2 कम्पनी टियर 3 को सर्विस देती है और टियर 3 से डाटा चार्ज लेकर अपना कमीशन काट कर टियर 1 को देती है अर्थात सही मायनो में इन्टरनेट की मालिक विश्व की कुछ प्राईवेट कम्पनियां है जिन्होंने पैसा लगाकर समुद्र में केबिल बिछाई है ।