कर्नाटक में गिरी भाजपा सरकार, फ्लोर टेस्ट से पहले येदियुरप्पा ने सदन मेेें दिया इस्तीफा

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कामयाब रही कांग्रेस-जेडीएस की रणनीति बीजेपी से अपने विधायकों को बचाने के लिए हरसंभव कोशिश की. उन्हें पिछले चार दिनों से अपनी निगरानी में रखा और बीजेपी की सेंधमारी से बचाने के लिए उन्हें हैदराबाद ले जाना पड़ा था. बीजेपी के लिए सदन में 112 विधायकों का जादुई आंकड़ा जुटा पाना एक बड़ी चुनौती थी. कांग्रेस-जेडीएस ने अपने एक-एक विधायकों पर पहरा लगा रखा था और पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट की नजर थी.

कर्नाटक विधानसभा में 222 सीटों के लिए चुनाव हुए. बहुमत के लिए 112 सीटों की जरूरत थी. बीजेपी के 104 विधायक जीतकर आए हैं. जेडीएस के 37 और कांग्रेस के 78 विधायक और 3 अन्य दलों के विधायक जीतकर आए हैं. येदियुरप्पा को बहुमत साबित करने के लिए 8 अतिरिक्त विधायकों की जरूरत थी. जिसे पार्टी नहीं जुटा पाई और फिर येदियुरप्पा ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया है.

बीएस येदियुरप्पा ने बहुमत परीक्षण से पहले ही इस्तीेफा दे दिया है. इस बार वो केवल ढाई दिन के लिए कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे. इस्तीफे से पहले कर्नाटक विधानसभा को संबोधित करते हुए येदियुरप्पा ने कहा कि ‘मैं वापस आऊंगा, 150 से ज्यादा सीटें जीतकर आऊंगा.’ उन्होंने कहा कि बीजेपी के पास बहुमत नहीं है और वो अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंपने जा रहे हैं.

येदियुरप्पा ने अपने भाषण में पीएम मोदी का शुक्रिया अदा किया. उन्होंने कहा कि शायद पहली बार किसी पीएम ने सीएम कैंडिडेट तय किया. साथ ही येदियुरप्पा ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह का भी धन्यवाद किया. उन्होंने सदन में भावुक भाषण दिया.

येदियुरप्पा ने कहा, ”मोदी और अमित शाह ने मुझे अप्रैल 2016 को कर्नाटक बीजेपी का अध्यक्ष बनाकर सीएम कैंडिडेट बनाया गया. उस दिन से आज तक मैं पूरे दो साल तक पूरे राज्य के सभी जगह जाकर समस्याओं को सुन रहा हूं. मैं लोगों का प्यार जीतने में सफल रहा. राज्य के लोग बड़े प्यार से हमारी कोशिशों को सराहते हैं, हमें इस सरकार के लिए जंग में पूरी हमदर्दी मिली. मेरे पास 104 विधायक हैं, पर राज्य के लोगों ने जेडीएस और कांग्रेस को नकार दिया है.”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस और जेडीएस को जनादेश नहीं मिला. वो लोग एक दूसरे को आपस में गाली-गलौज करते रहे और झगड़ा करते रहे. इनको लोगों ने बता दिया कि इस प्रजातंत्र व्यवस्था में उनका स्थान कहां है. दोनों पक्ष चुनाव में हारने के बाद लोगों के जनादेश के खिलाफ अपने अधिकार के लिए मौका देखकर गठबंधन किया. दोनों ही पार्टियां अवसरवादी हैं.