विश्व जूनोसिस दिवस – पशु-पक्षी आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और व्यवहारिक कारणों से देवताओं के वाहन – योग गुरु महेश अग्रवाल

शेयर करें:

आदर्श योग आध्यात्मिक केंद्र स्वर्ण जयंती पार्क कोलार रोड़ भोपाल के संचालक योग गुरु महेश अग्रवाल ने बताया कि आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और व्यवहारिक कारणों से ऋषि मुनियों ने भगवानों के वाहनों के रुप में पशु – पक्षियों को जोड़ा है | यह भी माना जाता है कि देवताओं के साथ पशुओं को उनके व्यवहार के अनुरूप जोड़ा गया है |

अगर पशुओं को भगवान के साथ नहीं जोड़ा जाता तो शायद पशु के प्रति हिंसा का व्यवहार और ज्यादा होता | इससे प्रकृति और उसमें रहने वाले जीवों की रक्षा का एक संदेश दिया है। हर पशु किसी न किसी भगवान का प्रतिनिधि है, उनका वाहन है, इसलिए इनकी हिंसा नहीं करनी चाहिए।

विश्व जूनोसिस दिवस के अवसर पर योग गुरु अग्रवाल ने कहा कि इसे मनाने का उद्देश्य पशुजन्य रोगों की विकराल समस्या के प्रति विश्व भर में जागरूकता फेैेलाना है ।आज से 137 वर्ष पूर्व 6 जुलाई 1885 को फ्रांस में लुई पाश्चर ने रेबीज के टीके की खोज की थी |

रोगों का पशु-पक्षियों से मनुष्यों में संक्रमण या तो सीधे सम्पर्क से होता है , या सान्निध्य से या संक्रमित मांस खाने या जल पीने आदि से । माॅंसाहारी भोजन तो इन रोगों के संक्रमण का मुख्य श्रोत है ही । जब से पशुजनित रोगों के विषय में जानकारी होती गयी, समय-समय पर इनके संक्रमण को रोकने के लिए कदम उठाये गये ।

वर्ष 2009 में भारतीय संसद ने पशु संक्रामक और संसर्गजन्य रोग निवारण एवम् रोकथाम अधिनियम, 2009 पारित किया जो अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों के निर्वहन के लिए और विशेषकर भारत से पशुओं से सम्बन्धित निर्यातों को बनाये रखने के लिए आवश्यक हो गया था | वैश्वीकरण भी पशुजन्य रोगों के संक्रमण का एक बड़ा कारण है ।

पहले किसी एक देश या महाद्वीप की अपनी बीमारियाॅं और अपनी औषधियाॅं होती थीं जो वहीं की सभ्यता तक सीमित रहती थीं । आज वैश्वीकरण की वजह से लोगों की यात्राएँ व स्थान परिवर्तन इतने बढ़ गये हैं कि वे अपने साथ अपनी सभ्यता, संस्कार व ज्ञान ही नहीं, रोग संक्रमाक जीवाश्म भी ले जाते हैं ।

इस रोगों की रोकथाम के लिए आवश्यक है कि हम सब इन रोगों के संक्रमण के प्रति जागरूक हो जायें और अपनी जीवनशैली में आवश्यक सुधार करें । अपने घरों, कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों, आदि को स्वच्छ और प्रदूषण रहित रखें, मांसाहारी भोजन को अच्छे से पकायें, पेयजल की स्वच्छता का ध्यान रखें, भोजन और जल को सदैव ढक कर रखें, और विशेशकर माॅसाहार करने के लिए सभी आवश्यक सावधानियाॅं बरतें, पालतू पशुओं को आवश्यक टीके लगवायें और उनसे अनावश्यक सान्निध्य से बचें ।