विश्व बाघ दिवस (29 जुलाई) – बाघ का सरंक्षण स्वस्थ जंगल और स्वस्थ जीवन का संकेतक – योग गुरु महेश अग्रवाल

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आदर्श योग आध्यात्मिक केंद्र स्वर्ण जयंती पार्क कोलार रोड़ भोपाल के संचालक योग गुरु महेश अग्रवाल ने बताया कि बाघ संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘विश्व बाघ दिवस’ मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य बाघों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा और बाघ संरक्षण के मुद्दों पर लोगों को जागरुक करना है। वर्ष  2010  में  रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में हुए बाघ सम्मेलन में 29 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस मनाने का निर्णय लिया।

योग गुरु अग्रवाल ने बताया हमारे ऋषि मुनियों ने जानवरो की रक्षा के लिए एवं उनके प्रति हमारा लगाव बना रहें इसके जानवरो के नाम से एवं उनके गुणों एवं लाभ के अनुसार योग आसनों की खोज की | जैसे कि सिंहासन, सिंहगर्जनासन (गर्जना करने वाला सिंह ),व्याघ्र क्रिया या बाधी क्रिया , इन क्रियाओं से अल्सर और अति अम्लता वाले रोग नहीं होते

पित्त शान्त होता है। सिरदर्द, माइग्रेन (आधासीसी दर्द) में बहुत ज्यादा फायदा होता है। सड़े हुए भोजन को बाहर निकाल कर मुँह से आने वाली दुर्गन्ध समाप्त होती है। भारीपन, क़ब्ज़, मितली आदि से छुटकारा मिलता है। उदर प्रदेश के अवयवों को उद्दीप्त करती है जिससे पाचन सम्बन्धी विकार दूर होता है। गैस की समस्या से छुटकारा मिलता है। सर्दी-खाँसी में लाभ मिलता है। आँखों की रोशनी बढ़ती है।

बाघ जंगल के स्वास्थ्य एवं शाकाहारी वन्य प्राणियों की उपलब्धता दर्शाते हैं। जहां जंगल अच्छा होगा, वहां बाघ होगा। भोजन श्रृंखला के व्यवहार पर बाघ और जंगल की स्थिति का पता चलता है। बाघ का वैज्ञानिक नाम पेंथेरा टिग्रिस है। यह भारत का राष्ट्रीय पशु भी है। बाघ शब्द संस्कृत के व्याघ्र का तदभव रूप है। प्रत्येक टाइगर में 100 से अधिक धारियां होती हैं, लेकिन किन्हीं भी दो टाइगर की धारियों का डिजाइन एक सा नहीं होता। बाघ रात में मनुष्य से 6 गुना बेहतर देख सकता है। वे न केवल देख कर, बल्कि सुन और सूंघकर भी शिकार कर सकते हैं।

बाघ, सिंह, तेंदुआ और चीता मात्र ये 4 जानवर हैं विश्व में, जो केवल दहाड़ सकते हैं, बोल नहीं सकते। सफेद बाघ सफेद रोग का शिकार नहीं होता, बल्कि ऑरेंज रंग के जीन्स न होने के कारण वह सफेद होता है। बाघ एक बार में 10 फीट ऊँचा कूद सकता है। बाघ इस प्रकार हमारी पृथ्वी पर सभी प्रजातियों के संरक्षण का प्रतीक बन जाता है क्योंकि यह खाद्य श्रृंखला में सबसे ऊपर है। यही कारण है कि हम कभी-कभी बाघ, एक शीर्ष शिकारी, हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का एक संकेतक कहते हैं।

हमारा अस्तित्व प्राकृतिक वातावरण पर निर्भर है क्योंकि यह हमें स्वच्छ हवा, भोजन और पानी प्रदान करता है। बाघ भोजन पिरामिड के शीर्ष पर हैं और एक स्वस्थ वातावरण के संकेतक हैं। ‘वेब ऑफ लाइफ’: प्रकृति की सभी चीजें, जिनमें मनुष्य भी शामिल हैं, परस्पर जुड़े हुए हैं – वेब के किसी भी घटक को बदलने से दूसरों पर प्रभाव पड़ेगा। बाघ को बचाने में हम पूरे पारिस्थितिकी तंत्र और उसके सभी निवासियों की रक्षा कर रहे हैं। हमें बाघों को बचाना चाहिए क्योंकि बाघों के लिए एक घर मतलब दूसरों के लिए एक घर सिर्फ एक बाघ के साथ, हम लगभग 100 वर्ग किमी जंगल की रक्षा करते हैं।