वर्ल्ड हेल्थ डे 2018: जाने दुनिया की कुछ घातक बीमारियों से बचाव के तरीके

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गृहिणी पूरे घर का खयाल रखती है, पर बारी जब खुद की आती है तो थोड़ी लापरवाह हो जाती है। नतीजा, बीमारी के रूप में सामने आता है। ज्वाइंट फैमिली में बीमार होने पर परिवार के सभी सदस्य उसकी मदद कर देते हैं। लेकिन, अगर बात हो न्यूक्लियर फैमिली की हो तो ऐसे मामलों में महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। हेल्थ प्राब्लम की सबसे बड़ी वजह ही यही होती है कि ज्यादातर महिलाएं अपनी सेहत के प्रति सजग नहीं रहती। हालांकि, अब यह तस्वीर बदल रही है, स्वास्थ्य को लेकर वे जागरूक हो रही हैं।

आज विश्व स्वास्थ्य दिवस है। यह दिवस हर वर्ष सात अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना की वर्षगांठ के दिन मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य दिवस का उद्देश्य स्वास्थ्य के प्रति जानकारी और जागरूकता का प्रसार करना है। हमें बुखार या खांसी-सर्दी हो जाए तो हम परेशान हो जाते हैं, लेकिन क्या आपको उन बीमारियों के बारे में मालूम है जो दुनिया में सबसे ज्यादा जानें लेती है. वर्ल्ड हेल्थ डे पर हम आपको बताने जा रहे हैं, दुनिया की पांच सबसे घातक बीमारियों के बारे में, साथ ही उनके बचाव के तरीके भी, ताकि आप स्वस्थ्य रह सकें.

इस वर्ष का विषय है- सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवच, सबके लिए, हर जगह।

कोरोनरी आर्टरी डिजीज– ये दिल की बीमारी है, जिसमें हृदय तक खून पहुंचाने वाली धमनियां सिकुड़ जाती हैं. हेल्थ केयर से जुड़ी सुविधाओं के आधुनिक होने और बेहतर दवाइयों की मौजूदगी के बाद भी इस बीमारी से मरने वालों की संख्या हर साल बढ़ रही है. साल 2000 में कोरोनरी आर्टरी डिजीज से मरने वालों की संख्या 60 लाख थी, जो साल 2015 में बढ़कर 88 लाख हो गई है.

कोरोनरी आर्टरी डिजीज से बचने के लिए अपनी सेहत का ध्यान रखें. चाहे आप कितने ही व्यस्त क्यों न हों, लेकिन अपनी व्यायाम के लिए समय जरूर निकालें. इसके साथ ही हेल्दी फूड खाएं, जंक फूड खाने से बचें. स्मोकिंग और अन्य प्रकार के नशे का सेवन न करें.

ब्रेन स्ट्रोक– डब्ल्यूएचओ के हिसाब से दुनिया की दूसरी जानलेवा बीमारी ब्रेन स्ट्रोक है. इसने साल 2015 में 62 लाख लोगों की जान ली थी. दुनिया के करीब 11.1 प्रतिशत मौतें इसी बीमारी की वजह से हुई हैं. मस्तिष्क की कोई धमनी में ब्लॉक होने या उसमें लीक होने से ब्रेन स्ट्रोक आता है. हाई बीपी, स्मोकिंग, ज्यादा मात्रा में गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन जैसी चीजें इसका खतरा बढ़ा देती हैं.

इस बीमारी से बचने के लिए एक्टिव लेकिन हेल्दी लाइफस्टाइल जिएं. व्यायाम करें, ज्यादा कोलेस्ट्रॉल या फैट वाली चीजें खानें से बचें. यदि आप बीपी के मरीज हैं, तो अपनी दवाइयां समय पर लेते रहें. बीपी में गड़बड़ी ब्रेन स्ट्रोक की बड़ी वजह है.

लोअर रेस्परेट्री इंफेक्शन– ये सांस संबंधी संक्रमण है. दुनियाभर में हुई कुल मौतों में से 5.7 प्रतिशत मौतें इस बीमारी के कारण हुई हैं. हालांकि, बेहतर दवाइयों की उपलब्धता से इस बीमारी से मरने वालों की संख्या में कमी आई है. साल 2015 में लोअर रेस्परेट्री इंफेक्शन 32 लाख लोगों की मौत की वजह बना था. यह इंफेक्शन शरीर के वायु-मार्ग और फेफड़ों को प्रभावित करता है. जिससे सांस से जुड़ी बीमारियां होती हैं.

इस संक्रमण से बचने के लिए ज्यादा वायु प्रदूषण वाली जगहों पर मास्क लगाकर बाहर निकलें. साथ ही स्मोकिंग और सिगरेट से निकलने वाले धुएं से बचें. हर साल फ्लू वैक्सीन लें. यदि संक्रमण होता है तो तुरंत डॉक्टर से इलाज करवाएं और घर पर आराम करें.

क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मनरी डिजीज– यह फेफड़ों से जुड़ी बीमारी है. क्रॉनिक ब्रॉन्काइटिस और इम्फिसेमा क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मनरी डिजीज के दो प्रकार हैं. स्मोकिंग, वायु प्रदूषण, पैसिव स्मोकिंग, बचपन में सांस से संबंधित हुआ संक्रमण इस बीमारी की बड़ी वजहों में शामिल हैं. ये बीमारी साल 2015 में करीब 31 लाख लोगों की मौत की वजह बनी थी.

क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मनरी डिजीज को लॉन्ग टर्म बीमारियों की लिस्ट में रखा जाता है. इस बीमारी की सबसे घातक बात ये है कि कोई भी दवाई इसे खत्म नहीं कर सकती. इसे सिर्फ सिर्फ दवाओं से कम किया जा सकता है. इस बीमारी के होने पर मरीज को नियमित रूप से जांच करवाना चाहिए और जरा सा भी दर्द होने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए.