आज है विश्व क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मनरी डिज़ीज़ जागरूकता दिवस

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वायु प्रदूषण से श्वसन रोग का ख़तरा होता है। वहीं यदि प्रदूषित हवा का स्तर घर के अंदर अधिक हो तो भी इसका प्रतिकूल असर फेफड़ों पर पड़ता है ।

सीओपीडी ऐसा ही एक गंभीर रोग है जिससे फेफड़ों को क्षति पहुंचती है और रोगी की स्थिति गंभीर हो जाती है । सीओपीडी होने के क्या कारण होते हैं और बचाव के लिए क्या करना होगा क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मनरी डिज़ीज़ (सीओपीडी):

कारण
*अधिक प्रदूषित वातावरण में रहना
*खाना बनाने के लिए जैव ईंधन का इस्तेमाल
*चूल्हे पर उपले, लकड़ी जलाकर खाना पकाना
*बीड़ी या सिगरेट पीना

ये रोग धीरे-धीरे बढ़ता है और फेफड़ों को क्षति पहुंचाता है जिससे व्यक्ति के लिए सांस लेना मुश्किल हो जाता है क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मनरी डिज़ीज़ (सीओपीडी) से ग्रस्त व्यक्ति में हृदय रोग, फेफड़ों का कैंसर और कई अन्य गंभीर बीमारियां होने की सम्भावना बढ़ जाती है ।

क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मनरी डिज़ीज़ (सीओपीडी): परेशानियां
*सांस लेने समस्या
*सांस फूलना
*सांस लेने पर आवाज़ आना
*खांसी
*शरीर में ऑक्सीजन की कमी
*कमज़ोरी

क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मनरी डिज़ीज़ (सीओपीडी): गंभीरता होने पर

*ऑक्सीजन की कमी की पूर्ती के लिए ऑक्सीजन सिलिंडर की जरुरत
*इन्हेलर का प्रयोग
*नेबुलाइज़र से दवाई दें

क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मनरी डिज़ीज़ (सीओपीडी): बचाव
*धूम्रपान न करें
*प्रदूषित वातावरण से बचें
*घर में अंदरूनी प्रदूषण को बढ़ाने वाले कारकों पर ध्यान दें
*खाना पकाने के लिए लकड़ी, उपले या कोयले का इस्तेमाल न करें
*योग व प्राणायाम करें
*सर्दियों के मौसम में विशेष सावधानी बरतें

सही प्रबंधन द्वारा क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मनरी डिज़ीज़ (सीओपीडी) से ग्रस्त व्यक्ति का जीवन बेहतर किया जा सकता है । उसके लक्षणों को नियंत्रित कर कई अन्य बीमारियों के ख़तरे को कम किया जा सकता है ।