महिला कारीगर बनी खुले में शौच मुक्ति संदेश की दूत

शेयर करें:

अलिराजपुर @ यदि किसी व्यक्ति को अवसर मिले और उस पर विश्वास किया जाए तो वह बड़ी चुनौती को भी मात दे सकता है। ऐसा ही कुछ अलीराजपुर जिले के सोंडवा विकासखंड के ग्राम दरकली की गुट्टी बाई ने कर दिखाया है। परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर होने के कारण गुजरात के नौसारी शहर में मजूदरी करते हुए कारीगरी (मिस्त्री) का काम सीखा लेकिन एक महिला मिस्त्री के रूप में काम नहीं कर पाएंगी ऐसा सोचकर किसी ने गुट्टीबाई पर विश्वास नहीं किया। हताश और निराश गुट्टीबाई अपने ग्राम दरकली आकर मजूदरी करने लगी लेकिन एक दिन खुले में शौच मुक्ति अभियान से जुडी टीम उनके घर पर शौचालय निर्माण की बात लेकर पहुंची। इसी दौरान गुट्टीबाई ने अपने कारीगरी काम के हुनर की बात बताई लेकिन पूर्व अनुभव के आधार पर उनके मन में आशंका थी की उन्हें यह काम सौपा जाएगा कि नहीं लेकिन ग्राम पंचायत ने गुट्टीबाई को सर्वप्रथम अपने घर पर ही शौचालय निर्माण का जिम्मा सौंपा।

फिर क्या था गुट्टीबाई ने पूरी मेहनत और लगन के साथ गुणवत्ता पूर्ण शौचालय निर्माण कर दिखाया। इस मेहनत और उनकी कार्य क्षमता को देखते हुए करीब 15 से अधिक शौचालय निर्माण का कार्य मिला। इस कार्य को भी पूरी मेहनत और लगन से उन्होंने पूरा किया। कारीगरी के कार्य में पुरूष प्रधान व्यवस्था के बीच एक महिला कारीगर ने पूरी शिद्दत से अपने कार्य को पूरा किया और जिला प्रशासन के साथ-साथ ग्रामीणों के बीच अपनी एक अलग पहचान बनाई। इस संबंध में गुट्टीबाई ने बताया मुझ पर विश्वास किया गया। मैनें पूरी मेहनत से इस काम को पूरा किया। मेरे जैसी ओर भी महिलाएं इस काम में आगे आए। हमारा ग्राम खुले में शौच जाने से मुक्त हो इसी इच्छा के साथ मैनें इस काम में अपना सहयोग दिया।

वहीं ग्राम रोजगार सहायक रेखा तोमर ने बताया गुट्टीबाई ने महिला होकर कारीगर का काम करके सबको चकित कर दिया। उन्होंने शौचालय निर्माण करते हुए ग्रामीणजनों को शौचालय के उपयोग के लाभ भी बताए। महिला सशक्तिकरण का बेहतर उदाहरण है गुट्टीबाई अलीराजपुर। जिस तरह से गुट्टीबाई ने कारीगर के काम को करते हुए शौचालय उपयोग की जानकारी भी लोगों तक पहुंचाई। यह उदाहरण एक बेहतर सामाजिक बदलाव को दर्शाता है। महिला सशक्तिकरण को लेकर गुट्टीबाई एक उदाहरण है। – गणेश शंकर मिश्रा, कलेक्टर अलीराजपुर