क्या कारण है कि मिश्री शक्कर से ज्यादा शुद्ध होती है?

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मिश्री बनाने के लिए गन्ने का ही उपयोग होता है. लेकिन मिश्री शक्कर से ज्यादा शुद्ध होती है. जिसका मुख्य कारन मिश्री को बनानी की विधि है. मिश्री में डोरा या धागा होता है. जब मिश्री बनाई जाती है. तब इस धागे को गन्ने के गाढे घोल में डुबाया जाता है. और इस धागे को लटकाया दिया जाता है. जिससे मिश्री के क्रिस्टल अपने आप प्राकृतिक रूप से प्राकृतिक क्रियाओ से बनने लगते है. जिसमे केमिकल का उपयोग नहीं किया जाता है. इस प्रकार से मिश्री बनानी की प्रक्रिया शक्कर बनानी की प्रक्रिया से भिन्न है. और इसी कारन मिश्री चीनी से ज्यादा शुद्ध होती है.

मिश्री के कुछ फायदे इस प्रकार हैं:—

  • अगर आपके मुह में छाले हुए है. सामान्य रूप से मुह के छाले पेट की गर्मी के कारन होते है. तो ऐसी परिस्थिति में मिश्री के साथ इलायची का पेस्ट बनाना कर छालो के ऊपर लगाए आपको जल्दी आराम मिल जाएगा.
  • आखों की द्रष्टि को बढ़ाने के लिए मिश्री का रोज सेवन या मिश्री का पानी बना कर पिए. मिश्री आँखों की रौशनी के लिए बहुत फायदेमंद होती है.
  • अगर किसी को मोतियाबिंद की समस्या होती है. तो उन्हें खाने के बाद नियमित रूप से मिश्री का सेवन करना चाहिए. जिससे मोतियाबिंद की समस्या में राहत मिलता है.
  • स्तनपान कराने वाली माताओं को मिश्री सेवन करने की सलाह दी जाती है. क्योंकि मिश्री माँ के दूध को बढ़ाता है.
  • किसी व्यक्ति को गले में खराश है तो उन्हें मिश्री को मुह में रहना चाहिए. जिससे गले की समस्या में आराम मिलता है.
  • टॉन्सिल्स (Tonsils) की समस्या उत्पन्न होने पर मिश्री, मक्खन और इलायची को एक साथ समान मात्रा में मिलाकर एक पेस्ट तैयार करना चाहिए. और इस पेस्ट को सुबह और शाम औषधि के रूप में लेना चाहिए. जिससे जल्दी आराम मिलता है.
  • नियमित रूप से मिश्री के सेवन से डिप्रेशन की समस्या दूर हो जाती है.