बाराबंकी : ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के लिए पीपल के पेड़ के नीचे बैठता है पूरा गाँव

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बाराबंकी. जनपद के विकास खंड हरख के सोहिलपुर गांव में ग्रामीणों ने कोरोना के कारण लोगों में घटते ऑक्सीजन लेवल के लिए एक अनोखा तरीका खोज निकाला है. या यूँ कहे कि ऑक्सीजन के मामले में यह गाँव आत्मनिर्भर बन गया है. ग्रामीणों ने ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने का जो तरीका ढूँढा है वह है गाँव में लगा पुराना पीपल का पेड़.

यह पेड़ वैसे तो काफी पुराना है लेकिन चर्चा में यह अब आया है. कोरोना की महामारी के दौरान ग्रामीण इस पेड़ के नीचे बैठकर अपनी ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने का काम करते हैं. ग्रामीण इस पेड़ के नीचे बैठकर काफी राहत भी महसूस कर रहे हैं. इस पेड़ के नीचे लगभग पूरा गाँव आकर इकट्ठा होकर अपना खाली समय भी व्यतीत करता है और शरीर का ऑक्सीजन लेवल भी बढ़ाता है.

ग्रामीणों से जब पूछा गया कि वह यहाँ बैठकर कैसा महसूस करते हैं तो उनका जवाब था कि यहाँ बैठने से उनको राहत महसूस होती है और यहाँ की ताजी हवा से उन्हें काफी अच्छा लगता है. इसीलिए यहाँ आकर बैठते हैं. कुछ ग्रामीणों ने बताया कि हिन्दू धर्म में यह मान्यता है कि पीपल के पेड़ पर देवताओं का वास होता है और इसे काटना नहीं चाहिए जबकि इसका दूसरा पहलू यह है जिसे विज्ञान भी मानता है कि पीपल का पेड़ सबसे ज्यादा ऑक्सीजन प्रदान करता है.

गाँव के इस पुराने पीपल के पेड़ के नीचे लोगों का खाली समय में आकर बैठने का यही कारण है कि लोग ऑक्सीजन की कमी के बारे में सुन रहे हैं और इसकी महत्ता समझ रहे हैं. पुराने पीपल के पेड़ के नीचे गाँव के बुजुर्ग भी राहत महसूस कर रहे हैं और युवा भी इससे मिलने वाले ऑक्सीजन का लाभ ले रहे हैं ताकि उनके अन्दर भी ऑक्सीजन की कमी न होने पाए.

एक ग्रामीण ने हमें बताया कि आजकल ऑक्सीजन वाले पेड़ की कमी बहुत है लोग काट दे रहे हैं, नीम का पेड़ तो कहीं दूर-दूर तक दिखाई नहीं देता है. इसलिए हम लोग यहाँ पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर ऑक्सीजन लेते हैं और बराबर यहाँ ऑक्सीजन मिलती है.