दिल्ली में वैक्सीन हो गई खत्म, केजरीवाल ने कहा मान लीजिए मेरी चार सलाह

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कोरोना संक्रमण के मामले और कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस की और बताया कि दिल्ली में कोरोना संक्रमण के नए मामलों में गिरावट देखी जा रही है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम सावधानियां बरतनी छोड़ दें. उन्होंने जानकारी दी कि दिल्ली में आज से 18 से अधिक उम्र के बच्चों का टीकाकरण रोक दिया गया है. केंद्र सरकार ने वैक्सीन की जितनी डोज भेजी थी वो खत्म हो गई है. इसके कारण कई वैक्सीन सेंटरों को बंद कर दिया गया है. कुछ डोज बचे हुए हैं जो आज शाम तक खत्म हो जाएंगे.

उन्होंने बताया कि कल यानि रविवार से युवाओं के वैक्सीनेशन के सभी सेंटर बंद हो जाएंगे. उन्होंने कहा कि हमने केंद्र सरकार से और वैक्सीन के डोज की मांग की है और जैसे ही ये डोज हमें मिलते हैं, दिल्ली में फिर से युवाओं का टीकाकरण शुरू कर दिया जाएगा.

18 प्लस के लिए हमें 2.5 करोड़ वैक्सीन की जरूरत है

उन्होंने बताया कि दिल्ली को अभी हर महीने 80 लाख वैक्सीन की जरूरत है. इसके बदले मई में हमें केवल 16 लाख वैक्सीन मिली है. जून के लिए केंद्र ने इस कोटे को और कम करके आठ लाख कर दिया है. अभी तक हम दिल्ली में 50 लाख वैक्सीन लगा चुके हैं और दिल्ली के सभी युवाओं के लिए हमें अभी ढाई करोड़ वैक्सीन की जरूरत है.

वैक्सीन की सप्लाई जल्द नहीं हुई तो परिणाम घातक हो सकते हैं
केजरीवाल ने कहा कि अगर इसी रफ्तार से हमें वैक्सीन मिली तो केवल दिल्ली के युवाओं को वैक्सीन लगाने में हमें 30 महीने लग जाएंगे. इतने दिनों में तो न जाने कितनी लहरें आएंगी और कितने लोग मर जाएंगे. अस्पताल, बेड, आईसीयू और वेंटिलेटर जैसी सुविधाओं की व्यवस्था तो हम कर ही रहे हैं लेकिन कोरोना के घातक परिणाम से बचाने में वैक्सीन ही सबसे असरदार है. वैक्सीन की कमी केवल सरकार की चिंता नहीं है, बल्कि आम आदमी भी इससे डरा हुआ है.

केजरीवाल ने केंद्र सरकार को दिए ये चार सुझाव…

1.भारतीय बायोटेक कंपनी जो कोवैक्सीन बनाती है, वह अपना फॉर्मूला दूसरी कंपनियों को देने के लिए तैयार है तो देश में वैक्सीन बनाने वाली अन्य सभी कंपनियों को बुलाकर युद्धस्तर पर इस फॉर्मूले से वैक्सीन बनाने का आदेश दें.
2. सभी विदेशी वैक्सीन को भारत में इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाए और विदेशी वैक्सीन के निर्माताओं से केंद्र सरकार खुद बात करे. यह काम राज्य सरकारों पर नहीं छोड़ना चाहिए.
3.कई राज्य जो अपनी जनसंख्या के मुकाबले अत्यधिक वैक्सीन जमा कर रहे हैं उनसे केंद्र को बात करनी चाहिए और ऐसा करने से मना करना चाहिए.
4.विदेशी वैक्सीन की कंपनियों को भारत में भी उत्पादन की अनुमति दी जाए.