साधु-संतों के ब्रह्मलीन होने के बाद उनकी भू समाधि के लिए उत्तराखंड सरकार ने दी मंजूरी

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प्रयागराज. हरिद्वार में आयोजित होने जा रहे महाकुंभ से पहले साधु संतों की पिछले कई वर्षों से चली आ रही मांग उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सिंह सरकार ने पूरी कर दी है. साधु-संतों के ब्रह्मलीन होने के बाद उनकी भू समाधि के लिए उत्तराखंड सरकार की ओर से जमीन देने का प्रस्ताव शुक्रवार को सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत की कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है. भू समाधि के लिए जमीन दिए जाने का साधु संतों की सबसे बड़ी संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने स्वागत किया है.

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का आभार जताया है. उन्होंने कहा है कि संन्यास परम्परा में संतो का शरीर पूरा होने के बाद उन्हें भू समाधि दिये जाने की परम्परा रही है. लेकिन हरिद्वार में भू समाधि के लिए जमीन उपलब्ध न होने के चलते साधु संतों के शरीर त्यागने के बाद उन्हें जल समाधि दी जाती थी.

जिससे जल प्रदूषण भी होता था. उन्होंने कहा है कि सिंचाई विभाग की 5 हेक्टेयर जमीन साधु संतों को भू समाधि के लिए दिए जाने से इस समस्या का स्थाई रूप से समाधान हो गया है. महंत नरेंद्र गिरी ने कहा है सभी संप्रदाय के साधु संत त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के फैसले का स्वागत कर रहे हैं.

उनका कहना है कि इस जमीन की देखभाल भी अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ही करेगा. अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने हरिद्वार के साधु संतों से अपील की है कि भू समाधि के लिए जमीन की उपलब्धता होने के बाद जल समाधि पूरी तरह से बंद कर दें. ताकि गंगा जल में कोई प्रदूषण न हो और गंगा का प्रवाह भी अविरल और निर्मल बना रहे.