बाबा रामदेव के फूड पार्क को जमीन देगी यूपी सरकार, कैबिनेट में लगी मुहर

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आज कैबिनेट बैठक में योग गुरू बाबा रामदेव के फूड पार्क को जमीन देने के प्रस्ताव पर मुहर लग गई है। लोक भवन में आज कैबिनेट बैठक में इसके साथ 11 अन्य प्रस्ताव पर सहमति जताई गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आज लोकभवन में कैबिनेट की बैठक सम्पन्न हो गई। बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री तथा प्रदेश सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने बताया कि आज बैठक में बाबा रामदेव के मेगा फूड पार्क को ग्रेटर नोएडा में जमीन देने के साथ ही 11 प्रस्तावों पर कैबिनेट ने अपनी मुहर लगा दी है।

प्रदेश सरकार बाबा रामदेव के प्रतिष्ठान पतंजलि मेगा फूड पार्क को ग्रेटर नोएडा में जमीन देगी। इसमें बड़ा निवेश होगा, जिससे दस हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। पतंजलि आयुर्वेद में पतंजलि मेगा फूड पार्क भी शामिल किया गया है। इसके साथ ही प्रदेश के औद्योगिक विकास प्राधिकरण के कर्मचारियों का एक दूसरे प्राधिकरण में हो तबादला करने के प्रस्ताव पर जी सहमति जताई गई। कैबिनेट बैठक में यूपीएसआईडीसी का यूपीसीडा में विलय को हरी झंडी दी गई। इसके बाद ही वाराणसी में काशी विश्वनाथ विशिषी विकास परिषद का गठन भी होगा। अब यह परिषद ही मंदिर क्षेत्र का विकास करेगा। प्रदेश सरकार ने इस प्रस्ताव पर भी सहमति जता दी है।

इन प्रस्तावों पर भी हो सकती है चर्चा:

  • मुरादाबाद के लोक निर्माण विभाग के आवासीय भवनों में स्थित श्रेणी-4 के दो आवासीय भवनों का ध्वस्तीकरण।
  • यूपी कोर रोड नेटवर्क डेवलपमेंट योजना के अंतर्गत हमीरपुर-राठ मार्ग के निर्माण परियोजना के एस्टीमेंट के मंजूरी पर विचार।
  • पैरा मेडिकल ट्रेनिंग कॉलेज झांसी के निर्माण में लागत व उच्च विशिष्टियों के प्रयोग को मंजूरी पर विचार।
  • निजी क्षेत्र में फूड पार्क की स्थापना से जुड़ी पॉलिसी को मंजूरी।
  • इसके अलावा प्रदेश कैबिनेट ने काफी दिनों पहले औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के कर्मियों को एक प्राधिकरण से दूसरे प्राधिकरण में भेजने के प्रस्ताव पर सहमति दी थी। औद्योगिक विकास विभाग ने इससे जुड़ी यूपी औद्योगिक विकास प्राधिकरण केंद्रीयत सेवा नियमावली को मंजूरी दिलाने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है।
  • इस सेवा नियमावली को मंजूरी देने का प्रस्ताव है। इससे एक ही प्राधिकरण में कर्मचारियों का तबादला किया जा सकेगा। कई प्राधिकरणों में कुछ ऐसे कर्मचारी व इंजीनियर हैं जिनका सिक्का चलता है। इससे उनका एकाधिकार टूट सकेगा।