महाभियोग को लेकर केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली का कांग्रेस पर हमला

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राज्य सभा के सभापति द्वारा प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग नोटिस खारिज किए जाने को चुनौती देने वाली कांग्रेस सांसदों की याचिका पर मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान कांग्रेस की तरफ से ये याचिका वापस ले ली गई. सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने इसे ख़ारिज कर दिया. दरअसल कांग्रेस की तरफ से इस याचिका को 5 जजों की संवैधानिक बेंच को सौंपने पर ऐतराज़ जताया गया है.

देश के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा को हटाने के मामले में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. कांग्रेस तथा कुछ विपक्षी दलों की ओर से दिए गए नोटिस को सभापति वेंकैया नायडू ने खारिज कर दिया, तो कांग्रेस के कुछ सांसद इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए. सभापति के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका कांग्रेस नेता व वरिष्ठ वकील कपिल सिबल ने मंगलवार को नाटकीय ढंग से वापस ले ली, जिसे संविधान पीठ ने वापस लिया मान कर खारिज कर दिया. याचिकाकर्ताओं के वकील कपिल सिब्बल ने बहस के शुरू में ही सीजेआई द्वारा इस मामले को संविधान पीठ को सौंपने के आदेश की प्रति मांगी, तो अदालत ने सिब्बल से आदेश की कॉपी की बजाय मेरिट पर जिरह करने को कहा. सिब्बल के अड़ने पर कोर्ट ने याचिका खारिज करने की बात कही, तो सिब्बल ने याचिका वापस ले ली.

पूरे मामले पर केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने फेसबुक पोस्ट लिखकर कांग्रेस पर हमला किया है. जेटली ने लिखा, “मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ़ कांग्रेस का महाभियोग प्रस्ताव पूरी तरह समझ से परे था. इसे ठीक से तैयार नहीं किया गया था और इसमें तथ्यों की कमी थी. अगर महाभियोग प्रस्ताव ठहरने वाला नहीं था तो ऐसे में राज्य सभा के सभापति के फ़ैसले को चुनौती देने वाली याचिका तर्कसंगत नहीं थी. सभापति द्वारा प्रस्ताव को खारिज किया जाना एक सही फैसला था और पीठ के द्वारा किसी प्रस्ताव को स्वीकार करने अथवा नहीं करने के फैसले की न्यायिक समीक्षा नहीं होनी चाहिए. याचिका कांग्रेस का एक दुस्साहस थी.”

गौरतलब है कि 23 अप्रैल को उपराष्ट्रपति ने विपक्ष के सात दलों के सांसदों के हस्ताक्षर वाले नोटिस को खारिज कर दिया था. इसके बाद बाकी दलों ने तो प्रतिक्रिया नहीं दी लेकिन कांग्रेस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई. अब देखना है कि क्या सुप्रीम कोर्ट से मामला खारिज होने के बाद ये प्रकरण यहीं समाप्त होता है या नहीं.