दिल्ली : रमजान के महीने में नमाज के लिए मस्जिद खोलने के मुद्दे पर केंद्र सरकार ने एक दिन में ही लिया यू-टर्न

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यहां सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में सरकार ने कहा कि लोगों को मस्जिद में नमाज पढ़ने की इजाजत दी जा सकती है, वहीं मंगलवार को उसने कोर्ट से कहा कि आपदा प्रबंधन के नियमों के तहत दिल्ली में धार्मिक सभाओं पर पाबंदी लगी हुई है।

क्या है पूरा मामला?
पिछले साल मार्च में तबलीगी जमात के विवादित आयोजन के बाद से ही बंद पड़ी मरकज मस्जिद को रमजान के महीने में नमाजियों के लिए खोलने का अनुरोध करते हुए दिल्ली वक्फ बोर्ड ने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान सोमवार को केंद्र सरकार ने कोर्ट में कहा था कि पुलिस द्वारा सत्यापित 200 लोगों की सूची में से 20 लोग एक बार में मस्जिद के अंदर दाखिल होकर नमाज पढ़ सकेंगे।

कोर्ट ने सरकार को लगाई थी फटकार
केंद्र की इस दलील पर हाई कोर्ट ने उसे जमकर फटकार लगाई और पूछा कि किस नोटिफिकेशन में उसने धार्मिक स्थलों पर एक बार में 20 लोगों के प्रवेश की सीमा लगाई है। कोर्ट ने कहा था कि जब बाकी धार्मिक स्थलों पर ऐसी कोई सीमा नहीं है तो मस्जिद पर भी शर्त नहीं लगाई जा सकती। उसने सरकार से हलफनामा दायर कर धार्मिक, राजनीतिक, एकेडमिक, खेल और सामाजिक सभाओं पर प्रतिबंध पर रुख साफ करने को कहा था।

मंगलवार को केंद्र सरकार ने बदला अपना रुख
अब कल मंगलवार को केंद्र सरकार ने कोर्ट में मामले पर अपना बयान बदलते हुए यू-टर्न ले लिया है। सुनवाई के दौरान सरकार के वकीलों ने कहा कि दिल्ली में दिल्ली आपदा प्रबंधन अधिनियम लागू है और इसके तहत शहर में कोई धार्मिक सभा नहीं हो सकती। कोर्ट दो दिन बाद सुनवाई करके मामले पर अपना फैसला सुनाएगा। उसने कहा है कि अगर आपदा प्रबंधन अधिनियम लागू है तो वह लोगों को नमाज की इजाजत नहीं दे सकता।

पिछले साल मरकज में क्या हुआ था?
मार्च में निजामुद्दीन की मरकज मस्जिद में तबलीगी जमात ने एक धार्मिक आयोजन किया था जिसमें विभिन्न राज्यों और देशों के हजारों लोग शामिल हुए थे। कोरोना वायरस महामारी की शुरूआत के समय हुए इस आयोजन को लोगों के इकट्ठा होने पर लगी पाबंदी के बावजूद आयोजित किया गया था और ये संक्रमण का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा था। इससे संबंधित 1,000 से अधिक लोगों को कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया था।