जीका वायरस से होने वाली बीमारी से बचाव

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झाबुआ @ मध्यप्रदेश में वर्ष 2018 से भोपाल, सीहोर, विदिशा, रायसेन और नरसिंहपुर आदि जिलों में जीका वायरस के प्रकरण पाये गये है।

जीका वायरस के कारण होने वाली बीमारी है। यह एडीज मच्छर के द्वारा फैलती है यह वायरस डेंगू, मलेरिया, चिकिनगुनियां की तरह मच्छर से फैलता है। एडिज मच्छर दिन में सक्रिय रहते है। डब्लू.एच.ओ. के अनुसार अगर किसी व्यक्ति को वायरस संक्रमित मच्छर काट लेता है तो उस व्यक्ति में वायरस पाये जाते है। इसी तरह यह बीमारी एक जगह से दूसरी जगह फैलती है। असुरिक्षत शारीरिक संबंध और संक्रमित खून से भी जीका वायरस फैलता है। यह वायरस खतरनाक है।

जब किसी गर्भवती महिला को हो जाये तो गर्भ में पल रहे बच्चे को भी यह बुखार हो सकता है। जिस बजह से बच्चें के सिर का विकास रूक जाता है। इसमें इंफेक्शन से स्किन रेशेज, दाग पीलिया, लिविर, अंधापन, दिमागी बुखार, सुनने में दिक्कत आ सकती है। तथा वयस्कों में जीका वायरस द्वारा शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली नसों को प्रभावित कर, पैरालाईसिस जैसी दिक्कत पैदा कर सकती है।

लक्षणः– वायरस की वजह से बुखार से पीड़ित व्यक्ति के शरीर में दर्द, थकान, शरीर पर लाल चकते, आंखों में सूजन, जोड़ों में दर्द इसके लक्षण डेंगू की तरह पाये जाते है।

 उपायः– इस वायरस का उपचार से ज्यादा मच्छरों से बचाव आवश्यक है। इसलिये मच्छरदानी का प्रयोग करें, पानी को न ठहरने दें, आसपास साफ-सफाई रखें। पूरे अस्तीन के कपड़े पहनें मच्छरों से बचने वाली चीजों का उपयोग करें, कूलर, टंकी, गमलों का पानी 5-6 दिन में साफ कर बदलें। जिससे मच्छर न पनपने पायें और बचाव हो।