तीन राज्यों में ढहा भाजपा का किला, कांग्रेस की जीत

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नईदिल्ली। राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ पर हुकूमत कर रही भारतीय जनता पार्टी को मंगलवार को जबरदस्त झटका लगा। राहुल गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने न केवल भगवा दल के तीन महत्वपूर्ण गढ़ ढहा दिए, बल्कि थोड़े उतार-चढ़ाव के साथ 2013 से जारी उसके अश्वमेध पर भी रोक लगा दी। उधर, तेलंगाना और मिजोरम में दोनों राष्ट्रीय पार्टियों को मायूसी हाथ लगी है।

राजस्थान में सरकार बदलने का ट्रेंड जारी

भाजपा तमाम कोशिशों के बावजूद राजस्थान में हर पांच साल में सरकार बदलने की परंपरा को नहीं तोड़ पाई। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट की अगुवाई में कांग्रेस ने वसुंधरा राजे सरकार को मात दे दी। देर शाम, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा भी सौंप दिया।

बता दें कि राज्य में वर्ष 1993 के बाद कोई भी दल लगातार दूसरी बार सरकार नहीं बना पाया है। तब भैरोंसिंह शेखावत के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी थी। इसके बाद 1998 व 2008 में कांग्रेस तो 2003 व 2013 में भाजपा सत्ता में रही। अब यहां गहलोत और पायलट के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

मध्य प्रदेश में कांटे का मुकाबला

सबसे रोचक मुकाबला मध्य प्रदेश में रहा। यहां भाजपा-कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। राज्य में किसी भी पार्टी को बहुमत मिलता नहीं दिख रहा। ऐसे में बसपा, सपा और निर्दलीय विधायक किंगमेकर हो सकते हैं। कांग्रेस 114 सीटों के साथ पहले नंबर पर और 109 सीटों के साथ भाजपा दूसरे स्थान पर है। वहीं, बसपा को 2, सपा को 1 और 4 सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गई हैं। 230 विधानसभा सीटों वाली राज्य विधानसभा में बहुमत के लिए 116 सीटों की जरूरत होती है।

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को दो तिहाई बहुमत

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने दो-तिहाई बहुमत से जीत हासिल कर 15 साल से सत्तारूढ़ भाजपा को बाहर कर दिया है। यहां पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का भी करिश्मा काम नहीं कर पाया। देर शाम मुख्यमंत्री रमन सिंह ने राज्यपाल को इस्तीफा भी सौंप दिया है।

तेलंगाना में पहले चुनाव की रणनीति काम आई

तेलंगाना में समय से पहले चुनाव करवाने की चंद्रशेखर राव की रणनीति काम आई और उनकी पार्टी टीआरएस दो-तिहाई बहुमत से ज्यादा सीटें जीती। वहीं, मिजोरम में दस साल बाद कांग्रेस ने मिजो नेशनल फ्रंट के हाथों सत्ता गंवा दी है। कांग्रेस को यहां केवल पांच सीटें मिलीं है।