राज्य संग्रहालय बना जन-आकर्षण का केन्द्र अन्य राज्यों से भी आ रहे हैं अध्ययन दल

शेयर करें:

मन्दसौर @ पुरातत्व विभाग का राज्य संग्रहालय जन-आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। इस संग्रहालय में वीथिकाओं में प्रदर्शित पुराव-शेष, पुरातात्विक महत्व की वस्तुएँ और प्राचीन दुर्लभ प्रतिमाओं के अवलोकन के लिए अन्य राज्यों के विद्यार्थी दल और अधिकारी निरंतर आ रहे हैं। विद्यार्थियों के दल और दिल्ली से आए अधिकारियों ने गुरुवार को संग्रहालय में पुरातात्वीय और ऐतिहासिक सामग्रियों का अवलोकन किया।

डॉ. निधि सिंह के नेतृत्व में असम राज्य के असम बैली स्कूल शोभितपुर से आये 34 विद्यार्थियों के दल ने संग्रहालय की उत्खनित वीथिकओं में पुरावशेषों की जानकारी ली। इस दल के विद्यार्थियों ने जाना कि भारत के प्राचीन-काल में व्यापार और आचार-विचारों का आदान-प्रदान की प्रक्रिया जानी। अहमदाबाद (गुजरात) की यूनाइटेड वर्ल्ड इंस्टीट्यूट ऑफ डिजायनिंग संस्था के 24 सदस्यों के दल ने भी संग्रहालय में प्रदर्शित कला अवशिष्टों को अपने नजरिए से परखा और स्केच भी बनाए। इस दल का नेतृत्व प्रो. विजय पुनिया ने किया।

नई दिल्ली से आए डॉ. अनिल घेई राज्य संग्रहालय में प्रदर्शित ग्वालियर राज्य के अभिलेख, मुद्राओं, मुद्रांक लघु चित्र प्रतिमाओं के साथ ग्वालियर राज्य के इतिहास से अवगत हुए। इसी दौरान पर्यटन विभाग दिल्ली से आए राज सिंह ने भी संग्रहालय का अवलोकन किया। विद्यार्थियों के दल की सदस्य स्वप्निल गुप्ता, प्रियंका ठक्कर, श्रेया और सुवर्णा सक्सेना ने मौके पर ही संग्रहालय की प्रतिमाओं की डिजाइन के स्केच तैयार किये।

इन छात्राओं ने बताया कि मध्यप्रदेश की राजधानी में राज्य संग्रहालय में प्रदर्शित देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ और प्राचीन परम्पराओं से सम्बन्धित ऐतिहासिक जानकारी अद्वितीय है। खासतौर संग्रहालय के अधिकारी बी.के. लोखण्डे द्वारा इतिहास संबंधी जानकारी का प्रस्तुतिकरण लाजवाब रहा है। छात्राओं का कहना था कि उनका दल ऐसे अद्वितीय संग्रहालय में बार-बार आना चाहेगा।