नए उपसभापति की चयन प्रक्रिया मॉनसून सत्र में होंगी पूरी

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उप सभापति का चयन औसत तौर पर 245 राज्यसभा सदस्यों में से किया जाता है। इसलिए जीत के लिए 122 सासंदों का संख्याबल जरूरी है। ससंद का मॉनसून सत्र इस बार राज्यसभा के नए उपसभापति के चुनाव का भी गवाह बनेगा । पीजे कुरियन का कार्यकाल एक जुलाई को समाप्त हो चुका है उनकी जगह नए उपसभापति की चयन प्रक्रिया संसद के मॉनसून सत्र के में होनी है । आइये जानते हैं कैसी हैं उसकी तैयारियां और कैसे होता है यह चुनाव

राज्यसभा के निवर्तमान उपसभापति पीजे कुरियन का कार्यकाल 1 जुलाई को समाप्त हो चुका है उनकी जगह नए उपसभापति की चयन प्रक्रिया संसद के मॉनसून सत्र में होनी है। स्थापित नियम यह है कि उपसभापति का निर्वाचन उस तिथि को होता है जो सभापति यानी उप राष्ट्रपति तय कर दें। इसके बाद राज्यसभा महासचिव की ओर से उच्च सदन के प्रत्येक सदस्य को चुनाव तिथि के बारे में लिखित सूचना दी जानी अनिवार्य होती है ।

आम तौर पर राज्यसभा में सभापति की तरह उपसभापति के निर्वाचन में भी केंद्र में सत्ताधारी पार्टी की अहम भूमिका होती है। उप सभापति का चयन औसत तौर पर 245 राज्यसभा सदस्यों में से किया जाता है। इसलिए जीत के लिए 122 सासंदों का संख्याबल जरूरी है। आंकडों पर गौर करें तो राज्यसभा में 69 सांसदों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है। लेकिन मौजूदा सियासी हालात में भाजपा के लिए उपसभापति पद पर अपना उम्मीदवार जिताने के लिए विपक्ष की भी मदद लेनी होगी।

कांग्रेस पार्टी की सदस्य संख्या 50 रह गई है, लेकिन विपक्षी एकता के बदले हालात में तृणमूल कांग्रेस के 13, समाजवादी पार्टी के 13, टीडीपी 6, डीएमके के 4, बसपा के 4, एनसीपी के 4 माकपा 4, भाकपा 1 व अन्य गैर भाजपा पार्टियों की सदस्य संख्या किसी भी पक्ष के उम्मीदवार को जिताने में अहम साबित हो सकती है। 13 सदस्यों वाली अन्नाद्रमुक के भाजपा के साथ जाने के आसार हैं लेकिन 9 सदस्यों वाला बीजू जनतादल व कुछ अन्य छोटे दलों का रुख भी अभी तक साफ नहीं है ।