बंदियों को भी गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार – वेदी

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गुना @ भारत के संविधान के अनुसार प्रदत्त मौलिक अधिकारों के अंतर्गत जेल में निरूद्ध बंदियों को भी गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार है। यह बात यहां जिला जेल में सम्पन्न हुए विधिक साक्षरता शिविर में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रूपम वेदी ने कही। यह शिविर मानव अधिकार आयोग स्थापना दिवस के अवसर पर यहां जिला जेल में आयोजित किया गया था। इसमें बंदियों के अधिकारों एवं कर्तव्यों के संबंध में चर्चा की गई।

रूपम ने कहा कि स्वछन्द विचरण के अधिकार के सिवाय बंदियों को अन्य सभी मौलिक अधिकार प्राप्त हैं। बंदियों की समस्याओं के पुनरावलोकन के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटी का गठन किया गया है। जो बंदियों की समस्याओं के निराकरण के लिए कार्य कर रही है।

उक्त कार्यक्रम में रजिस्ट्रार/ सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के.के.मिश्रा ने तर्क सौदाकारी (प्ली बारगेनिंग) की प्रक्रिया से बंदियों को अवगत कराया तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गुना द्वारा बंदियों के हितार्थ चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम में मानव अधिकार आयोग म.प्र. के आयोग मित्र डॉ.वी.के.गोयल, डॉ. ललित कुमार शर्मा, डॉ. के.पी. अरोरा, जाफर खान पठान, डॉ. बी.एस.कुशवाह, परवीक्षाधीन जेल अधीक्षक भास्कर पान्डे, जिला विधिक सहायता अधिकारी दीपक शर्मा एवं जेल उप निरीक्षक अतुल सिन्हा ने भी मानव अधिकारों के संबंध में अपने विचार रखे। उक्त कार्यक्रम में जेल प्रशासन के अधिकारी कर्मचारी एवं विचाराधीन बंदी उपस्थित रहे।