व्यक्ति होगा संवेदनशील, तभी रूकेगा मानवाधिकारों का हनन – न्यायाधीश संजीव दत्ता

शेयर करें:

गुना @ हर व्यक्ति को संवदेनशील होना होगा, तभी हम मानव अधिकारों के हनन को रोककर मानव अधिकारों का संरक्षण कर सकते हैं। उक्त विचार जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव दत्ता ने जिला न्यायालय परिसर स्थित ए.डी.आर भवन में म.प्र. मानव अधिकार आयोग के स्थापना दिवस पर मानव अधिकार एवं म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण विषय पर आयोजित विचार-गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किये।

दत्ता ने कहा कि जरूरतमंद पीड़ितों को सहायता पहुंचाने की दृष्टि से मध्यप्रदेश में 13 सितंबर 1995 को मानव अधिकार आयोग का गठन किया गया था। मध्यप्रदेश राज्य मानव अधिकार आयोग का गठन करने वाले अग्रणी राज्यों में से एक है। मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग मानव अधिकारों के संवर्द्धन और संरक्षण के लिये कार्य करता है।

कार्यक्रम में आयोग मित्र डॉ. एल.के.शर्मा ने मानव अधिकार आयोग में आयोग मित्रों की भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में आयोग मित्र एवं जिला संयोजक डॉ. वी.के.गोयल ने मानव अधिकार आयोग के समक्ष शिकायत करने की प्रक्रिया आयोग व आयोग की प्रणाली के बारे में बताया। कार्यक्रम में आयोग मित्र जाफर खान पठान, अधिवक्ता मजहर आलम, सचिव जिला अधिवक्ता संघ धर्मेन्द्र श्रीवास्तव ने भी अपने विचार रखे।

कार्यक्रम में प्रधान न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायायलय हरिशंकर वैश्य, विशेष न्यायाधीश प्रदीप मित्तल, अपर जिला जज शशिकांता वैश्य, निवेदिता मुदगल, संजय गुप्ता जिला रजिस्ट्रार/ सचिव, के.के.मिश्रा न्यायिक मजिस्ट्रेट, कौशलेन्द्र सिंह भदौरिया, जे.बी.एस.राजपूत, महेश कुमार वर्मा, आकांक्षा कत्याल, राजीव पटेल, आयोग मित्र के.पी.अरोरा, जिला विधिक सहायता अधिकारी दीपक शर्मा, प्रशिक्षित अधिवक्ता मध्यस्थ, रामपालसिंह परमार, कु. रश्मि सक्सेना, नागेन्द्र गौढ, सहित अधिवक्तागण, पैरालीगल वॉलेंटियर्स उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन जिला विधिक सहायता अधिकारी शर्मा ने एवं आभार प्रदर्शन सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गुना मिश्रा ने किया।