उच्च स्तरीय समिति ने नई हज नीति पर सौंपी अपनी रिपोर्ट

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अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के द्वारा 2013-17 के लिए सरकार की हज नीति की समीक्षा करने और हज नीति 2018-22 की रूपरेखा का सुझाव देने के लिए गठित समिति ने आज मुंबई में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी को अपनी रिपोर्ट सौंपी।

भारतीय हज समिति और निजी टूर आपरेटरों के लिए हज नीति के बारे में उच्चतम न्यायालय के निर्देशों को देखते हुए मौजूदा नीतियों की समीक्षा करने और एक नई नीति बनाने का निर्णय लिया गया है। जिसके लिए अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने एक समिति गठित की।

समिति ने 15 फरवरी, 2017 से अपना काम शुरू किया और सूचना एकत्र करने और अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के कई बैठकें कीं। इसने सभी स्टेकहोल्डरों, समुदाय के नेताओं और सामान्य जनता से व्यापक परामर्श किया। समिति ने सऊदी अरब राज्य में विभिन्न स्थानों पर भारत के महाकौंसलावास(सीजीआई), जेद्दा द्वारा की गई हज व्यवस्थाओं की समग्र स्थिति को देखने के लिए अप्रैल, 2017 में सऊदी अरब राज्य का दौरा किया।

समिति ने महाकौंसल और उसकी टीम के साथ कौंसलावास की भूमिका और कार्यों के बारे में बातचीत की और भारतीय हज समिति तथा सीजीआई के बीच पारस्परिक संबंध और समन्वय की प्रभावशीलता पर विचार-विमर्श किया।

समिति की मुख्य सिफारिशें निम्नलिखित अनुसार हैं-

भारतीय हज समिति के लिए सरकार की हज नीति:
1. भारतीय हज समिति और निजी टूर आपरेटरों के बीच कोटे का वितरण अगले 5 वर्षों के लिए 70:30 के अनुपात में युक्तिसंगत बनाया जाए।
2. राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के बीच सीटों का वितरण उनकी मुस्लिम आबादी के अनुपात के साथ-साथ प्राप्त आवेदनों के अनुपात में किया जाए।
3. मेहरम के लिए कोटा 200 से बढ़ाकर 500 किया जाए।
4. जम्मू एवं कश्मीर के लिए विशेष कोटा 1500 से बढ़ाकर 2000 किया जाए।
5. 500 से कम आवेदन प्राप्त करने वाले राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को अधिशेष सीटों के वितरण में प्राथमिकता दी जाएगी। इससे अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, दादर एवं नागर हवेली, दमन एवं दिव तथा पुडूचेरी जैसे संघ राज्य क्षेत्रों के साथ-साथ छत्तीसगढ़, गोवा, हिमाचल प्रदेश और मणिपुर जैसे छोटे राज्यों को लाभ होगा।
6. आवेदकों की आरक्षित श्रेणी अर्थात् 70+ तथा चौथी बार वालों को समाप्त किया जाए।
7. 45 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को मेहरम के बिना हज के लिए चार या इससे अधिक के समूह में जाने की अनुमति दी जाए।
8. मक्का, अजीजीया और आस-पास के क्षेत्रों में केवल एक श्रेणी का आवास यात्रियों के लिए परिवहन की सुविधाओं के साथ नई, बहु-मंजिला आधुनिक इमारतों में किराये पर लिया जाए।
9. बाद के वर्ष में नई, अच्छी और बड़ी इमारतों में पुनः किराये पर लेने की व्यवस्था की जाए।
10. मदीना में सभी आवास केवल मरकजिया में ही किराये पर लिए जाएं।
11. भारतीय हाजियों को ठहराना मीना की पारंपरिक सीमाओं के भीतर सुनिश्चित किया जाए।
12. प्रत्येक तीर्थ-यात्री के लिए अदाही कूपन अनिवार्य बनाए जाएं।
13. ठेकेदारों के संघ को पारदर्शी बोली प्रक्रिया से तोड़ा जाए। बेहतर बातचीत से किराये की दर नीचे लाई जाए।
14. आरोहण स्थल (ईपी) 21 से घटाकर 9 किए जाएं जो (1) दिल्ली (2) लखनऊ (3) कोलकाता (4) अहमदाबाद (5) मुंबई (6) चेन्नई (7) हैदराबाद (8) बैंगलूरू और (9) कोचीन में हों। इन आरोहरण स्थलों पर उपयुक्त हज गृहों का निर्माण किया जाए। राज्य/जिलों को प्रत्येक आरोहण स्थल के साथ उचित रूप से जोड़ा जाए।
15. बंद कर दिए गए आरोहण स्थलों पर निर्मित सुविधाओं का उपयोग वर्ष भर प्रशिक्षण, तीर्थ-यात्रियों के अभिमुखीकरण और समुदाय के लिए अन्य उत्पादक प्रयोगों के लिए किया जाए।
16. पोत के द्वारा हज यात्रा करने के बारे में सऊदी सरकार से परामर्श किया जाए और उसके बाद ऐसी यात्रा के लिए बाजार की थाह लेने के लिए रूचि की अभिव्यक्ति का विज्ञापन दिया जाए।

निजी टूर आपरेटरों के लिए सरकार की नीति:

17. पीटीओ आवेदनों पर कार्रवाई के लिए एक मजबूत पोर्टल विकसित किया जाए।
18. हज प्रभाग के निर्णयों से दुखी पीटीओ के अभ्यावेदनों पर विचार करने के लिए 2-3 विशेषज्ञों की एक समिति बनाई जाए।
19. पीटीओ को उनके अनुभव और वित्तीय क्षमता के अनुसार तीन वर्गों में वर्गीकृत किया जाए। पीटीओ का कोटा वैयक्तिक पीटीओ को सीटों का 200:100:50 के अनुपात में आबंटन करने के प्रावधान के साथ तीनों वर्गों के बीच 30:40:30 के अनुपात में विभाजित किया जाए।
20. पीटीओ के लिए एक व्यापक पैनलीकरण नीति तैयार की जाए जिससे आसानी एवं तेजी से नवीकरण करने में सुविधा होगी। पैनल में शामिल करना दस्तावेजों के साथ-साथ पीटीओ के वास्ताविक निरीक्षण के आधार पर किया जाए। पीटीओ को सूची से निकालने और प्रतिभूति जमा को जब्त करने के लिए कठोर मानकों का अनुसरण किया जाए।
21. पीटीओ यात्रियों से केवल बैंक खाते के माध्यम से पूर्ण पैकेज लागत वसूल करें और भारत से यात्रियों के प्रस्थान से पूर्व मंत्रालय को विवरण प्रस्तुत करें।
22. प्रत्येक पीटीओ के पास पूर्व निर्धारित प्रकटन मानदंडों के साथ एक सही-सही वेबसाइट होनी चाहिए।
23. पीटीओ का नाम बदलकर हज समूह संगठक (एचजीओ) किया जाए।
अन्य सिफारिशें
24. बेहतर समन्वय के लिए सचिव (अल्पसंख्यक कार्य) और सचिव (विदेश मंत्रालय) की सह-अध्यक्षता में अन्य संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संचालन समिति का गठन किया जाए।
25. भारत से दो सदस्यीय हज सद्भावना प्रतिनिधि मंडल जारी रहे।
26. सीरिया, ईरान, ईराक और जोर्डन तक उमरा और जियारत शामिल करने, पुराने उपबंधों को हटाने, भारतीय हज समिति में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय का अधिकारी शामिल करने आदि के बारे में हज समिति अधिनियम में संशोधन।

उपर्युक्त के अतिरिक्त, विभिन्न मंत्रालयों/एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए और हज तीर्थ-यात्रियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए कई अन्य सिफारिशें की गई हैं। इसकी प्रस्त