11 मार्च से दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का स्थापना सम्मेलन, 47 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल

शेयर करें:

दुनियां को क्लीन एनर्जी और ग्रीन एनर्जी का एक बड़ा प्लेटफार्म देकर भारत ने जो पहल की है उसको जमीन पर उतारने की शुरूआत होने जा रही है। कल से शुरू हो रहे अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन सम्मेलन के सदस्यों का राष्ट्रपति आज औपचारिक स्वागत करेंगे। जिसमें 47 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेगें। सौर ऊर्जा के 121 देशो वाले संगठन की शुरूआत पीएम मोदी की पहल पर हुई थी।

एक बेहतर भविष्य के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का जो विचार दुनिया के सामने रखा था उसी के आधार पर फ्रांस की राजधानी पेरिस में 30 नवंबर 2015 को अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन यानी आइएसए अस्तित्व में आया । इस संगठन का उद्देश्य दुनिया भर को न केवल साफ ऊर्जा उपलब्ध कराना है बल्कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एकजुट होकर पर्यावरण को बचाने के लिए प्रयास करना है । दुनिया भर के 121 देश इसके सदस्य हैं और अब संयुक्त राष्ट्र से मान्यता मिलने के बाद संस्थान और मजबूत बना है ।

11 मार्च से दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के सदस्य देशों का स्थापना सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है । वैसे तो गठबंधन में 121 देश है लेकिन अभी तक 60 देशों ने इस पर हस्तक्षार किए हैं जबकि 30 देशों ने इसको अनुमोदित किया है । बताया जा रहा है कि 47 देशों के प्रतिनिधि सम्मेलन में हिस्सा लेंगे जबकि करीब 25 देशों के राष्ट्रप्रमुख सम्मेलन में शिरकत करने के लिए आ रहे हैं । 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के राष्ट्रपति इमेनुअल मैक्रॉ संयुक्त रुप से इस सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे । इसके अलावा श्रीलंका , बांग्लादेश , सेशेल्स , घाना , आस्ट्रेलिया , वेनुजएला , फिजी , मॉरीशस के नेता इसमें हिस्सा लेने के लिए पहुंच रहे हैं । विश्व बैंक , एडीबी , ब्रिक्स बैंक और , यूरोपीय निवेश बैंक के प्रमुखों के भी इसमें हिस्सा लेने की उम्मीद है ।

सम्मेलन में सभी देश सौर ऊर्जा के क्षेत्र में न केवल अपने प्रयासों की जानकारी देंगे बल्कि आगामी वर्षों में क्या कुछ विशेष करने वाले हैं, इस बारे में रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। आइएसए का सचिवालय दिल्ली के पास गुरुग्राम में है । प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी और फ्रांस के तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति फ्रैंकोई होलांदे ने पेरिस में संयुक्‍त राष्‍ट्र जलवायु परिवर्तन सम्‍मेलन के अवसर पर अंतर्राष्‍ट्रीय सौर गठबंधन की शुरुआत की थी। सूर्य की रोशनी की अधिकता वाले देश इस गठबंधन का हिस्सा हैं । दरअसल सौर ऊर्जा न केवल बेहद सस्ती है बल्कि स्वच्छ ऊर्जा है ।

दुनिया में अभी 303 गीगावाट सौर ऊर्जा का इस्तेमाल हो रहा है। सौर गठबंधन ने 2030 तक 1000 GW सौर ऊर्जा हासिल करने का लक्ष्य रखा है । भारत ने गठबंधन के लिए शुरु में 100 करोड़ का फंड दिया था और 2030 तक ISA ने सौर ऊर्जा में 1 ट्रिलियन ड़ॉलर निवेश का लक्ष्य रखा है । इसके लिए गठबंधन को विश्व बैंक जैसी संस्थाओं से वित्तीय मदद मिल रही है ।

दुनिया के साथ ही देश में भी सौर ऊर्जा को लेकर सरकार काफी काम कर रही है ।भारत ने 2022 तक 100 गीगावट सौर ऊर्जा हासिल करने का लक्ष्य रखा है । साथ ही देश में सोलर पार्क विकसित किये जा रहे है । इसके अलावा सरकार ऐसी योजनाएं ला रही है जिससे किसानों को भी सौर ऊर्जा का फायदा मिले ।

सौर गठबंधन के जरिए भारत की कोशिश होगी कि अफ्रीका व दुनिया के दूसरे हिस्सों के छोटे-छोटे देशों को उनकी ऊर्जा सुरक्षा में योगदान दिया जाए, ताकि आगे चल कर इन देशों के साथ दूसरे क्षेत्रों में भी सहयोग स्थापित हो सके। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की डिप्लोमैसी के जरिए भारत की विदेश नीति को नयी धार मिली है ।