महिलाओं के इर्द गिर्द घूमती देश की राजनीति

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✍ भोलानाथ मिश्र

स समय पिछले कुछ दिनों से राजनीति महिलाओं के इर्दगिर्द घूमकर राजनैतिक भविष्य तय करने में लगी है।इधर महिलाओं को राजनैतिक धूरी बनाकर राजनीति चमकाने की कोशिशें की जा रही हैं तथा पुरूषों को उनके हाल पर छोड़ दिया जा रहा है।

यह सही है कि महिलाएं पुरुषों की अपेक्षा अबतक काफी उपेक्षित एवं शोषित रही हैं और उनकी अगुवाई करने के नाम पर सिर्फ खानापूरी होती रही है। महिला आरक्षण बिल पिछले लम्बे अरसे लम्बित पड़ा हुआ है और उसे कानून का स्वरूप नहीं मिल पा रहा है।इधर मुस्लिम महिलाओं से जुड़ा तीन तलाक का मामला जोर पकड़ता जा रहा है और भाजपा मुस्लिम महिलाओं की हिमायती बनकर तीन तलाक बिल पारित करवाकर कानूनी जामा पहनाने पर आमादा दिखती है।

भाजपा मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक के नाम पुरूषों से बगावत कराकर घर में राजनैतिक डाका डालने की राह पर चल रही है। यह सही है कि हिन्दुओं की अपेक्षा मुस्लिम महिलाओं के साथ जुल्म ज्यादती अधिक होती है और तीन तलाक के नाम जिंदगी बरबाद कर दी जाती है। कहने का मतलब लोकसभा में लम्बित महिला आरक्षण बिल राजनीति का शिकार हो रहा है और सत्ता एवं विपक्ष दोनों इसके लिए एक दूसरे को दोषी एवं महिला विरोधी बता रहे हैं।

महिला आरक्षण बिल महिलाओं के सशक्तिकरण के मार्ग में रोड़ा बना हुआ है और जिस दिन तैतीस फीसदी की भागीदारी महिलाओं की हो जायेगी उस दिन महिलाओं का असित्व उभरकर सामने आ जायेगा।

तीन तलाक मुद्दे पर विपक्ष को कटघरे में खड़ा करने वाले प्रधानमंत्री के प्रयास के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जी ने इस सम्बंध में एक पत्र लिखकर राजनीति की बिसात पर नहले पर दहला मार दिया है और सरकार से महिला आरक्षण विधेयक पारित कराने का अनुरोध किया है।

इस विधेयक के पास हो जाने के बाद लोकसभा और राज्यसभा में महिलाओं को 33% आरक्षण मिल जायेगा।महिला आरक्षण विधेयक पिछले कुछ समय से राजनैतिक मैदान में खिलौना बना है और बाहर से सभी इसकी पैरवी करते हैं लेकिन अंदर इसे पास नहीं होने देना चाहते हैं।

यह तो राजनैतिक दाँव और भावी लोकसभा चुनाव हैं जोकि महिला आरक्षण के समर्थन में इस समय भाषणबाज़ी का दौर शुरू है और कांग्रेस को महिला हिमायती साबित करने के लिए प्रधानमंत्री को खत लिखना पड़ रहा है। महिला आरक्षण बिल अरसे से राजनैतिक कूटनीति का शिकार हैं अन्यथा यह बिल कब का पास हो गया होता।

कहने का मतलब महिला आरक्षण बिल महिलाओं के सशक्तिकरण के मार्ग में रोड़ा बना हुआ है और जिस दिन तैतीस फीसदी की भागीदारी महिलाओं की हो जायेगी उस दिन महिलाओं का असित्व उभरकर सामने आ जायेगा। महिलाओं का असली उत्थान अथवा कल्याण तब होगा जबकि राजनीति के साथ साथ उन्हें अन्य क्षेत्रों में भी आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराये जाय।

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हमें गर्व है कि हमारी महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना रही हैं और चाहे मेट्रो रेल हो चाहे लड़ाकू विमान हो चाहे अंतरिक्ष यात्रा हो। महिलाओं को तैतीस फीसदी भागीदारी दिलाने के नाम पर अगर सभी सहमत हैं तो आरक्षण बिल की जरुरत ही नहीं है। महिलाओं के प्रति यदि दिली लगाव एवं इतनी निष्ठा होती तो उन्हें अबतक उनका अधिकार स्वतः मिल गया होता।????????