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अखाड़ा परिषद ने किया शाही स्नान का बहिष्कार

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इलाहाबाद। साधु-संतों की जानी-मानी संस्था अखिल भारतीय अखाडा परिषद ने कुंभ 2019 में शाही स्नान का बहिष्कार करने की घोषणा की।परिषद के अध्यक्ष नरेन्द्र गिरी ने आज यहां श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा में आयोजित बैठक में कहा कि सरकार द्वारा संत-महात्माओं की लगातार उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जायेगी।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार से मध्यप्रदेश के उज्जैन में 2016 में सम्पन्न कुंभ मेला की तर्ज पर प्रयाग में व्यवस्था कराने की लिखित अपील की गयी लेकिन उस पर किसी प्रकार कार्यवाही नहीं की गयी। केवल आश्वासन ही दिया जाता रहा।

उन्होंने कहा कि यदि शासन और प्रशासन इसी प्रकार उपेक्षा करता रहा और उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो परिषद कुंभ में न किसी प्रकार की मूलभूत सुविधा लेगा और न/न ही शाही स्नान में शिरकत करेंगे। उन्होंने कहा कि अखाडा ही कुंभ की शान हैं। अखाड़ों के शाही स्नान देखने के लिए विदेश भी लोग यहां पहुंचते हैं। साधु-संत अपने हिसाब से आयेंगे और गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती में आस्था की डुबकी लगायेंगे।

अध्यक्ष ने कहा कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के मौखिक आदेश के साथ ही प्रशासन कुंभ में अखाड़ों के लिए व्यवस्था समय रहते की गयी थी लेकिन यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मौखिक आदेश का प्रशासन कोई तवज्जो नहीं दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि श्री योगी को मुख्य सचिव गुमराह कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कुंभ 2019 को विशेष इवेन्ट के रूप में परिलक्षित करने की घोषणा की है। वह चाहते हैं कुंभ विश्व में अद्वतीय रूप में पहचाना जाये। उन्होंने आरोप लगाया कि शासन पर प्रशासन भारी पड़ रहा है। मुख्यमंत्री का मौखिक आदेश भी अपने आप में एक आदेश है, लेकिन प्रशासन इसे महत्ता नहीं दे रहा है।

परिषद अध्यक्ष ने कहा कि सरकार ने मेला विकास प्राधिकरण की घोषणा की लेकिन उसमें भी अखाड़ा परिषद की उपेक्षा की गयी। परिषद ने मांग किया कि अखाड़ा परिषद की एक निगरानी कमेटी बनायी जाये जिसकी व्यवस्था परिषद के पदेन अध्यक्ष एंव महामंत्री करेंगे। इस निगरानी कमेटी में सभी 13 अखाडों के एक -एक प्रतिनिधि रहेंगे। बैठक में सनातन धर्म का गलत प्रचार करने या आपराधिक कार्यो में लिप्त रहने का आरोप लगाते हुए आज दो और बाबाओं चक्रपाणी महराज और प्रमोद कृष्णनन को फर्जी करार दिया है।

उन्होंने बताया कि इनका न/न तो किसी अखाडा और न ही किसी साधु परंपरा से सम्बन्ध है। परिषद ने घोषणा किया कि जो भी साधु समाज इनके कार्यक्रमों में शिरकत करेगा या इनकाे आमंत्रित करेगा परिषद द्वारा उसे बहिष्कृत माना जायेगा। गौरतलब है कि इससे पहले अखिल भारतीय अखाडा परिषद ने दस सितंबर 2017 को जारी सूची में 14 बाबाओं और 29 दिसंबर को तीन धर्मगुरुओं का नाम फर्जी बाबा के रूप में घोषित कर चुकी है।

अब तक 19 बाबाओं को फर्जी बाबा घोषित किया जा चुका है। परिषद के अनुसार कथावाचकों को संत नहीं कहा जाना चाहिए। कथावाचक सिर्फ कथावाचक है। ऐसे लोग जो किसी परंपरा से जुड़े नहीं हैं, वे संत नहीं हो सकते हैं। ऐसे लोग मनमुखी संत हैं, भीड़ बटोरने से कोई संत नहीं हो जाता है। संत होने के लिए सनातन, संन्यासी, आचार्य, नाथ जैसी किसी परंपरा से जुड़ाव जरूरी है।

अब तक डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह,आशाराम बापू उर्फ आशूमल शिरमलानी, सुखविंदर कौर, सच्चिदानन्द उर्फ राधे मां , ओम बाबा उर्फ विवेकानन्द झा, निर्मल बाबा उर्फ निर्मलजीत सिंह, इच्छाधारी भीमानन्द उर्फ शिवूर्ति द्विवेदी, स्वामी असीमानन्द, ऊं नम: शिवाय बाबा, नारायण सांई , रामपाल, कुशिमुनि, बृहस्पति गिरि और मलखान गिरि, सचिदानन्द सरस्वती (बस्ती वाले) वीरेन्द्र देव दीक्षित कालनेमी (दिल्ली) और इलाहाबाद की धर्माचार्य त्रिकाल भवन्ता को फर्जी बाबा घोषित किया जा चुका है।