आतंकी बने फुटबॉलर ने किया सरेंडर

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सुबह का भूला अगर शाम को घर आ जाए तो उसे भूला नहीं कहते. एक हफ्ते पहले जम्मू-कश्मीर के युवा फुटबॉलर मजीद अर्शिद खान ने आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा में शामिल होने का एलान किया था लेकिन आज वो सभी के सामने बंदूक छोड़ मुख्यधारा में शामिल होने के लिए आगे आ गया. मजीद के फैसले की सराहना करते हुए राज्य और केंद्र सरकार दोनों ने कहा है कि अगर मजीद की तरह दूसरे आतंकी भी हिंसा की राह छोड़ शांति की तरफ क़दम बढ़ाते हैं, तो उनकी पूरी मदद की जाएगी.

जम्मू-कश्मीर में करीब एक हफ़्ते पहले पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा में शामिल हुआ एक युवा फुटबॉलर वापस मुख्यधारा में शामिल हो गया है. अनंतनाग के मजीद अर्शिद खान ने लोगों की अपील पर आतंकवाद का रास्ता छोड़ दिया है. पुलिस के सामने ख़ुद आकर आत्मसमर्पण करने के बाद फिलहाल वह पुलिस की हिरासत में है, जहां उससे पूछताछ की जा रही है.

ग़ौरतलब है कि 10 नवंबर को मजीद ने सोशल साइट फेसबुक पर लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ने का एलान किया था. इसी फ़ेसबुक पोस्ट में उसने फोटो भी डाला था, जिसमें वह एके-47 राइफल पकड़े था. मजीद एक मशहूर फुटबॉलर है और एक गैर-सरकारी संगठन के साथ काम भी कर चुका है.

पुलिस महानिरीक्षक मुनीर अहमद खान ने गुरुवार को ही कहा था कि अगर माजिद और अन्य आतंकवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्य धारा में लौटते हैं तो उनके पुर्नवास में मदद की जाएगी. अब अपने बेटे को वापस पाकर माजिद के मां-बाप की ख़ुशी का ठिकाना नहीं है. माजिद की वापसी पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर के युवा अब आतंकवादी संगठनों के झांसे में नहीं आने वाले हैं.

माजिद की घर वापसी पर मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने भी ट्वीट कर कहा- एक मां का प्यार जीत गया. उनकी स्नेहपूर्ण अपील से भविष्य के एक अच्छे फुटबॉल खिलाड़ी को वापस लाने में मदद मिली. जब कभी भी एक युवा हिंसा का रास्ता अपनाता है, तो इससे सबसे ज़्यादा नुकसान उसके परिवार को ही होता है. मेरी सरकार ऐसे युवाओं के पुनर्वास के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे उनका भविष्य सुरक्षित हो और उनको कोई परेशानी न हो.