किसानों की आय दोगुनी करना लक्ष्य: पीएम

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा उनकी सरकार की मुख्य प्राथमिकता किसानों की आय दोगुनी कर उनके जीवन को सुगम बनाना है, राजधानी दिल्ली में कृषि उन्नति मेले में किसानों से जैविक खेती को अपनाने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने पूसा में आयोजित कृषि उन्नति मेले में शिरकत की। प्रधानमंत्री ने मेले में कई स्टालों का अवलोकन किया। जिनमें कृषि लागत में कमी करने की जानकारी के साथ ही जोखिम प्रबंधन भी शामिल रहा। साथ ही स्टॉल के ज़रिए कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों की नई टेक्नोलॉजी,माइक्रो एरिगेशन, वेस्ट वाटर यूटिलाइजेशन को प्रदर्शित किया गया। साथ ही कृषि के क्षेत्र में हुयी प्रगति और आधुनिक तकनीक की जानकारी देने वाला ये मेला 18 मार्च तक चलेगा। इस बार का मुख्य विषय 2022 तक किसानों की आय दोगुना करना है।

यह मेला कृषि अनुसंधान और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की प्राथमिकता वाले क्षेत्र पर एक विशेष थीम के साथ हर साल आयोजित किया जाता है। गौरतलब है कि इस मेले का आयोजन सन् 1972 से शुरू हुआ था और ये भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) का एक अहम सालाना समारोह है। इस दौरान कृषि क्षेत्र के लिए सहायक प्रौद्योगिकी की भी जानकारी दी गयी। इसमें सामान्‍य और पर्यावरण अनुकूल कृषि के साथ-साथ जैविक खेती पर भी ज़ोर रहा। इस दौरान 2022 तक कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ करने और इसे अधिक आय वाला बनाने के लिए बागवानी, पशुपालन,मधुमक्खी पालन, मुर्गी पालन और पारंपरिक खेती में प्रौद्योगिकी इस्तेमाल के लिए भी प्रेरित किया गया।

प्रधानमंत्री का इस मौक़े पर केले के रेशे से बने शॉल और इलाइची से बनी हुई माला पहनाकर स्वागत किया गया। इस मौक़े पर प्रधानमंत्री ने देश के 13 राज्यों में बनने वाले 25 कृषि विज्ञान केंद्रों की आधारशिला रखी। साथ ही उन्होने जैविक खेती पोर्टल का शुभारम्‍भ भी किया। ये पोर्टल जैविक खेती से जुड़े बाज़ार से लेकर विशेषज्ञों की राय एक ही प्लेटफार्म पर रखेगा। जैविक खाद का कलस्टर आधारित फार्मिंग को बढ़ावा देना यानि जैविक महाकुंभ भी इस मेले का आकर्षण है।

25 कृषि विज्ञान केंद्रों की प्रधानमंत्री ने रखी आधारशिलाजैविक खेती पोर्टल का किया उद्घाटनबीज से बाज़ार तक की सूचना होगी उपलब्ध। इसी के साथ प्रधानमंत्री ने कृषि कर्मण पुरस्‍कार और पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय कृषि विज्ञान प्रोत्‍साहन पुरस्‍कार भी प्रदान किए। कृषि कर्मण पुरस्कार के तहत 10 मिलियन टन से अधिक उत्पादन वाले राज्यों को दिया गया। इनमें तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश सहित पांच राज्यों को ये पुरस्कार मिला। जिसमें पंजाब को एकल फसल में चावल के ज़्यादा उत्पादन पर दिया गया।

प्रधानमंत्री ने सम्मेलन को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने नए भारत के निर्माण में किसानों और वैज्ञानिकों को कर्णधार बताया। उन्होंने किसानों से सकारात्मक प्रतिस्पर्धा और प्रोत्साहन की बात कही। साथ ही प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि किसान किसी भी लक्ष्य हासिल करने के लिए तैयार है। उन्होने चुनौतियों के बीच सरकार के प्रयासों से कृषि क्षेत्र की दशा और दिशा बदलने की भी बात कही।

प्रधानमंत्री ने सॉयल हेल्थ कार्ड से लेकर नीम कोटिंग यूरिया के उत्पादन और फसल बीमा जैसी योजनाओं का ज़िक्र किया। साथ ही प्रधानमंत्री ने तकनीक के प्रयोग की अपील की। इस बीच उन्होने किसानों से आग्रह किया कि पर्यावरण और मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए पराली ना जलाऐं।

प्रधानमंत्री ने व्यापक न्यूतम सर्मथन मूल्य की बजटीय घोषणा को सम्मेलन में रखते हुए कहा कि अधिसूचित फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारण में कृषि लागत से लेकर किसान परिवार के श्रम को भी जोड़ा जाएगा।