सिलाई का कारोबार बना जीने का सहारा

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अनुपपुर @ हाथों में हुनर था, कुछ करने की ललक भी थी, लेकिन आर्थिक तंगी में सबसे पहले पेट भरने की चिंता में जिंदगी कट रही थी। कुछ और सोचने का वक्त ही नहीं मिलता था। कुछ ऐसा ही हो रहा था सालरगोदी ग्राम की प्रेमवती और उसके परिवार के साथ।

अनूपपुर जिले के आदिवासी बाहुल्य विकासखंड पुष्पराजगढ के ग्राम सालरगोदी में प्रेमवती और उसके पति अपने दो बच्चों के साथ दो एकड़ असिंचित जमीन पर थोड़ी बहुत खेती बाड़ी और मेहनत मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे थे। पति बीरबल को सिलाई कार्य आता था लेकिन पूंजी की कमी से वह कुछ करने की नहीं सोच पा रहे थे, गांव के ही ट्रक में मेहनत मजदूरी को उन्होंने अपनी नियति समझ लिया था। लेकिन प्रेमवती लगातार कुछ करने की सोचती रहती थी।

म.प्र. दीन दयाल अन्त्योदय योजना, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत समूह से जुड़कर समूह की बारीकियों को प्रेमवती ने समझा और समूह की मदद से अपना भविष्य संवारने का दृढ़ निश्चय कर लिया। प्रारंभिक समय में कुछ छोटे छोटे ऋण लेकर अपना काम चलाया तथा कुछ दिनों बाद समूह से पांच हजार रू ऋण लेकर एक पुरानी सिलाई मशीन और सिलाई हेतु कुछ आवश्यक सामग्री खरीदी तथा पति को समझा बुझाकर सिलाई का काम प्रारंभ करने के लिए प्रेरित किया। धीरे-धीरे सिलाई का काम चल निकला, साथ ही साथ प्रेमवती भी अपने पति से ही सिलाई का काम सीखने लगी।

काम करते करते हुनर में निखार आया एवं पति एवं पत्नी दोनों को काम आगे बढ़ाने की जरूरत महसूस होने लेगी। एक बार फिर समूह ने प्रेमवती की मदद की और तीस हजार रू के ऋण से तीन सिलाई मषीन, एक इंटरलाक मशीन और कुछ कपड़े खरीदी तथा गांव में सिलाई का कार्य जानने वाली तीन और महिलाओं को अपने यहां सिलाई कार्य के लिए काम पर रख लिया। सालरगोदी में व्यवसाय की कम संभावनाओं को देखते हुए पति पत्नी ने अपनी दुकान समीपस्थ अपेक्षाकृत बड़ी जगह करपा में अपना व्यवसाय स्थापित किया और समूह से पुराना लिया ऋण वापस कर पुनः चालीस हजार रू से रेडीमेड गारमेंट्स का भी प्रारंभ कर दिया।

आज दोनों पति पत्नि अपने व्यवसाय से प्रसन्न हैं और प्रतिमाह पंद्रह से सोलह हजार रू की आय प्राप्त कर रहे हैं। विश्वकर्मा टेलर्स क्षेत्र का जाना पहचाना नाम बन चुका है। होने वाली आय से एक पुरानी मोटर सायकल भी घर में आ गयी है, जिससे आसपास के बाजार और अन्य कार्यों को करने में आसानी हो गयी है। बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। गरीबी से बाहर आने की दृढ़ इच्छाशक्ति, सकारात्मक सोच, कुछ करने की लगन और सही वक्त पर मिलने वाली मदद से किसी एक परिवार का जीवन कैसे बदल जाता है इसका जीता जागता उदाहरण है प्रेमवती का परिवार।