मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना से युवा बन रहे हैं सफल व्यवसायी

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मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना प्रदेश के बेरोजगारों को स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने में मील का पत्थर साबित हो रही है। युवा इस योजना के माध्यम से नौकरी देने वाले बन रहे हैं। साथ ही सम्मानजनक रूप से अर्थोपार्जन कर रहे हैं।

छिन्दवाड़ा जिले में सौंसर विकासखण्ड के ग्राम पिपलानारायणवार के नितिन गुडधे पिता उमाजी गुड़धे ने वर्ष 2012 में मेकेनिकल ब्रांच में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। डेढ़ वर्ष तक एक कंपनी में काम किया, फिर नागपुर में नौकरी की तलाश में पहुँचे। परिस्थिवश दोना-पत्तल का व्यवसाय किया और नागपुर से सामान लाकर ग्रामीण अंचलों में बेचने लगे। स्वयं की दोना-पत्तल निर्माण इकाई स्थापित करना चाहते थे, लेकिन आर्थिक अभाव में यह संभव नहीं हो पा रहा था।

नितिन को जिला हथकरघा कार्यालय से मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की जानकारी मिली, तो उसने ऋण के लिये ऑनलाइन आवेदन किया। भारतीय स्टेट बैंक 4.29 लाख रूपये का ऋण स्वीकृत हुआ। हथकरघा कार्यालय द्वारा 1.29 लाख रूपये की मार्जिन मनी अनुदान स्वरूप उपलब्ध करवाई गयी।

युवा इंजीनियर नितिन ने 2017-18 में दोना पत्तल ईकाई में उत्पादन प्रारंभ किया। अब रोज 10 हजार दोना-पत्तलों का उत्पादन कर आस-पास के क्षेत्र में बेच रहे हैं। सब खर्च और ऋण की किश्त के भुगतान के बाद न्यूनतम 15 हजार रूपये महीना कमा रहे हैं। उन्होंने दो कारीगरों को भी सम्मानजनक वेतन पर रोजगार दे रखा है। नितिन अब नाश्ते की प्लेट बनाकर विक्रय की योजना बना रहे हैं।

देवास जिले के किशोर पिता रणछोड़ जनोलिया अलंकार मार्केट में प्रिंटिग प्रेस के मालिक हैं। अपनी प्रेस में कई दिनों से कटिंग एवं बाइंडिंग मशीन की कमी महसूस कर रहे थे। किशोर ने जिला अंत्यवसायी कार्यालय में संपर्क किया, जहां उन्हें मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की जानकारी प्राप्त हुई।

किशोर ने आवेदन किया, तो 5 लाख रूपये का लोन मिला, जिसमें 30 प्रतिशत सब्सिडी मिली। किशोर ने ऑटोमैटिक कटिंग तथा बाइंडिंग मशीन खरीदी, जिससे अब 8 से 10 हजार रूपये प्रति माह अतिरिक्त कमाई कर रहा है। किशोर ने अपनी प्रेस में दो अन्य लोगों को रोजगार भी दिया है।