भारत-चीन के सांस्कृतिक रिश्तों में आई मज़बूती

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भारत और चीन समृद्ध संस्कृतियों वाले देश हैं और शुक्रवार को इसी की एक बानगी को देखा गया जब पीएम मोदी हुबई संग्रहालय देखने पहुंचे. दो दिवसीय दौरे पर चीन पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वुहान के हुबई संग्रहालय से अपनी यात्रा की शुरुआत की. उन्होंने चीन के सबसे मशहूर हुबई म्यूज़ियम का जायज़ा लिया. वहां पीएम मोदी का चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने स्वागत किया. इस दौरान हुबई संग्रहालय में आयोजित रंगारंग कार्यक्रमों में दोनों नेताओं ने चीन के पारंपरिक बिओनजोंग संगीत को सुना.

भारत-चीन अनौपचारिक शिखर वार्ता के पहला दिन और पहली तस्वीर की झलक हुबई संग्रहालय से जब दुनिया के सामने पहुंची तो दोनों नेताओं की सकारात्मक पहल साफ दिखी.

दोनों देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को प्रगाढ़ बनाने की शुरुआत पारंपरिक बिओनजोंग संगीत से हुई. तांबे की बनी घंटियों के ज़रिए उठने वाले संगीत ने एक अलग ही समा ला खड़ा किया. गौरतलब है कि बिओनजोंग संगीत हुबई प्रांत की परंपरा में है और इसके साक्ष्य 2 हज़ार साल से भी ज्यादा पुराने हैं. इस दौरान प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले कलाकारों से मुलाक़ात कर सांस्कृतिक मूल्यों के लिए उत्साह भी बढ़ाया.

संग्रहालय परिसर में ही दोनों नेताओं की एक दूसरे के साथ मुलाक़ात हुई. इस दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वुहान शहर के बारे में प्रधानमंत्री मोदी को जानकारी दी. प्रधानमंत्री मोदी ने भी दोनों देशों के लिए नदी किनारे पनपती सभ्यतों की समानताओं को बताया. कलाएं दुनिया का एक ऐसा सूत्र हैं जो बिना किसी भाषा बोली के पहुंचती हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी ने चीन के पारंपरिक वाद्य यंत्र से मधुर स्वरों को उभारा और उनका साथ दिया राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने.

मुलाक़ात के बाद दोनों ही नेताओं ने हुबई संग्रहालय का जायज़ा लिया. इसमें कई पुरातन ऐतिहासिक चीज़ों का संग्रह है. इसका ख़ास आर्कषण यहां रखी हुई विशाल तांबे की घंटियां हैं. ये सन् 1978 में एक खुदाई के दौरान हुबई प्रांत के ही शासक मारक़ूस की क्रब के पास ही मिली थीं. मारकूस का शासनकाल 430 ईसा पूर्व तत्तकालीन जेंग प्रांत में था. इस संग्रहालय में पुरात्तव महत्व की लगभग 2 लाख वस्तुएं रखी गई हैं. हुबई संग्रहालय चीन के बड़े संग्रहालयों में से एक है. इसे 1958 में स्थापित किया गया था और मौजूदा स्थान पर इसे 1960 में स्थानांतरित किया गया था.

एशिया के इन दो देशों के बीच संस्कृति से सहयोग और सहयोग से समृद्धि का अंकुर ज़रूर एक नए फलक को खींच रहा. ऐसे में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का प्रधानमंत्री के सम्मान में रात्रि भोज और शनिवार को यांग्से नदी के पूर्वी भाग में बातचीत के तय कार्यक्रम उम्मीदों को पंख लगा रहे हैं.