द. अफ्रीका में विदेश मंत्री ने ‘बर्थ ऑफ सत्याग्रह’ नाम से गांधी की प्रतिमा का किया अनावरण

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दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर गई विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पेंट्रीच से पीटरमारित्जबर्ग स्टेशन तक की यात्रा ट्रेन से कर 125 साल पहले घटी उस घटना की याद दिलाई जिसने मोहन दास करम चंद गांधी को सत्याग्रह का सिपाही बना दिया।

अपने दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर गई विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पेंट्रीच से पीटरमारित्जबर्ग स्टेशन तक की यात्रा ट्रेन से कर 125 साल पहले घटी उस घटना की याद दिलाई जिसने मोहन दास करम चंद गांधी को सत्याग्रह का सिपाही बना दिया। गौरतलब है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने साल 1893 में यहीं से अन्याय और उपनिवेशवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई का आगाज़ किया था।

यह वहीं रेलवे स्टेशन है जहां ठीक 125 साल पहले महात्मा गांधी को अश्वेत होने की वजह से ट्रेन के डिब्बे से बाहर फेंक दिया गया था और इसी घटना ने उन्हें सत्याग्रह करने के लिए प्रेरित किया था। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की दक्षिण अफ्रीका की यात्रा इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि यह न सिर्फ पीटरमारित्जबर्ग घटना के 125 साल पूरा होने का मौका है बल्कि दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों के 25 साल पूरा होने का भी अवसर है।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने स्टेशन परिसर में ‘बर्थ ऑफ सत्याग्रह’ नाम से महात्मा गांधी की दो तरफ वाली अर्धप्रतिमा का अनावरण किया। जो मोहनदास करम चंद गांधी के महात्मा गांधी बनने की यात्रा और उनके द्वारा किए गए मानव कल्याण के कार्यों को याद दिलाता रहेगा।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने महात्मा गांधी डिजिटल संग्रहालय का भी उद्घाटन किया। जिसमें इंटरेक्टीव स्क्रीन, वीडियो और ऑडियो कमेंट्री के जरिए पीटरमारित्जबर्ग घटना को दर्शाया गया है। उन्होंने ‘बर्थ ऑफ सत्याग्रह’ नाम की एक कॉफी-टेबल किताब का भी विमोचन किया।

इस अवसर पर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों के 25 साल पूरा होने के मौके पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और दक्षिण अफ्रीका के उप-विदेश मंत्री लुवेलीन लेंडर्स ने संयुक्त रुप से पंडित दीनदयाल उपाध्याय और रंगभेद नीति के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले और अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष रहे ओलिवर टैंबू का डाक टिकट जारी किया।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने दक्षिण अफ्रीका के 20 प्रवासियों और 5 भारतीयों को निबंध प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए सम्मानित किया। इन प्रतियोगियों ने ‘आपके जीवन में बदलाव के क्षण क्या थे?’ का उत्तर निबंध के रूप में दिया था।