शिवराज सरकार को केंद्र से नहीं मिल रही सहायता राशि: कुसुम मेहदेले

शेयर करें:

भोपाल@ केंद्र में यूपीए सरकार के समय तो प्रदेश सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान बहुत कोसा करते थे लेकिन अब अपनी ही पार्टी की सरकार होते हुए भी प्रदेश के लिए पैसा लाने में पसीना छूट रहा है। प्रदेश में अभी से पीने के पानी की त्राहि-त्राहि मचने लगी है इसका दर्द शिवराज मंत्री मंडल का भी दर्द छलक पड़ा है। मोदी सरकार से परेशानी में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के बाद अब मध्य प्रदेश में शिवराज कैबिनेट भी शामिल हो गई।

राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना के तहत मध्य प्रदेश को मोदी सरकार से मिल रही कम राशि पर पीएचई मंत्री कुसुम मेहदेले ने अपना दर्द बयां किया है। विधानसभा में अपने भाषण के दौरान केंद्र के कारण योजना के क्रियान्वयन में आ रही दिक्कतों का जिक्र मंत्री मेहदेले ने अपना भाषण में किया। बजट सत्र के दौरान कुसुम मेहदेले ने अपने विभाग से जुड़ी बातें रखते हुए केंद्र से मिल रही कम मदद का हवाला भी किया।

उन्होंने कहा कि इस वजह से विभाग को अपनी योजनाओं को सही तरीके से लागू करने में परेशान हो रही है। हालांकि, मेहदेले ने सूखे के हालातों से निपटने के लिए तैयार की गई कार्ययोजना का जिक्र करते हुए कहा है कि शहरी और ग्रामीण आबादी को पानी की कमी नहीं आने दी जाएगी, उन्होंने कहा कि जरुरत पड़ने पर सरकार परिवहन के जरिए पानी पहुंचाने का काम करेगी।

पेयजल के लिए सरकार ने इस बार बजट में 534.73 करोड़ की राशि का प्रावधान किया है।  जल निगम के लिये 1395 करोड़ और ग्रामीण पेयजल सरकार 273.82 करोड़ खर्च करेगी। सरकार ने दावा किया है कि साल 2022 तक 90 प्रतिशत ग्रामीण आबादी को नल-जल योजनाओं से जोड़ा जाएगा।