प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड में चार-चार स्थानों पर स्व-चलित मौसम केन्द्र बनेंगे

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भोपाल @ प्रदेश में किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयासों के काफी अच्छे परिणाम सामने आये हैं। इस संबंध में प्रदेश के लिये जो रोडमैप तैयार किया गया था, उसमें सभी के समन्वित प्रयासों से अभूतपूर्व सफलता मिली है। यह बात गत दिवस कृषि उत्पादन आयुक्त पी.सी.मीणा ने भोपाल और नर्मदापुरम संभाग की रबी वर्ष 2017-18 की उपलब्धि तथा आगामी खरीफ के प्रस्तावित कार्यक्रम की समीक्षा के संबंध में एपेक्स बैंक के सभागार में सम्पन्न बैठक में कही। बैठक में प्रमुख सचिव कृषि राजेश राजौरा, भोपाल संभाग के आयुक्त कवीन्द्र कियावत, होशंगाबाद संभाग के आयुक्त उमाकांत राव, दोनों संभागों के जिला कलेक्टर, सीईओ जिला पंचायत तथा संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

कृषि उत्पादन आयुक्त मीणा ने कलेक्टर्स से कहा कि वे अपने-अपने जिलों में रासायनिक उर्वरकों के अग्रिम उठाव के लिये विभिन्न माध्यमों से किसानों को प्रेरित करें। क्योंकि वर्षा ऋतु में बोनी शुरू होते ही उर्वरकों की मांग तेजी से बढ़ेगी। अभी उठाव होने पर किसानों के पासजरूरत के समय उर्वरक उपलब्ध रहेगी। उन्होंने अमानक स्तर के खाद, बीज और कीटनाशकों के संबंध में प्रभावी कार्यवाही करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि कीटनाशकों के उपयोग पर किसानों को सबसे ज्यादा राशि खर्च करनी पड़ती है, यदि कीटनाशक निष्प्रभावी या कम प्रभावी होते है तो उसको सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ता है। मीणा ने कहा कि कलेक्टर तथा कृषि और राजस्व विभाग के अधिकारी मूंग और उड़द के पंजीयन का सत्यापन अवश्य करें।

बैठक को संबोधित करते हुए प्रमुख सचिव कृषि राजेश राजौरा ने कहा कि भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में रबी सत्र में प्रति हैक्टर उत्पादकता बढ़ी है। कृषि विभाग के अधिकारी खरीफ सीजन के लिये सोयाबीन के उन्नत नस्ल के बीजों का उपयोग करने के लिये किसानों को प्रेरित करें। उन्होंने फसल बीमा योजना के संबंध में विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि इस योजना में जो संशोधन हुए हैं, उनकी जानकारी किसानों को अवश्य दें।

राजौरा ने बताया कि फसल बीमा योजना के सूचकों (इंडिकेटर्स) के संबंध में अब प्रत्येक विकासखंड में चार स्वचलित मौसम केन्द्रों की स्थापना अतिशीघ्र की जा रही है। इन केन्द्रों के स्थापित होने पर मौसम का फसलों पर पड़ने वाले प्रभाव की सही स्थिति तत्काल मालूम पड़ सकेगी। इससे प्रशासनिक अधिकारियों और कृषि विभाग के अमले को फसलों की वास्तविक स्थिति तत्काल पता चल जायेगी। फसल कटाई के प्रयोग के आंकड़े मोबाइल एप के माध्यम से भेजने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि इससे वास्तविक रकबे और उत्पादन की स्थिति का वैज्ञानिक आकलन हो सकेगा। जैविक खेती के प्रसार पर जोर देते हुए राजौरा ने कहा कि दोनो संभागों में नर्मदा नदी के किनारे बसे ग्यारह सौ गांवों में इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाये। बैठक में साइल हैल्थ कार्ड योजना की समीक्षा करते हुए राजौरा ने कहा कि मिट्टी परीक्षण के परिणामों से किसानों को अवगत कराया जाये।

पशु पालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आगामी 1 जुलाई से दुधारू जानवरों में फैलने वाली खुर-पका, मुंह-पका बीमारियों की रोकथाम के लिये प्रदेश व्यापी अभियान चलाया जायेगा। कृत्रिम गर्भाधान और हरा-चारा का उपयोग बढ़ाने के संबंध में भी मैदानी अधिकारियों से विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में सहकारिता, उद्यानिकी, डेयरी, पशु पालन और मत्स्य पालन विभागों द्वारा संचालित गतिविधियों की विस्तार से समीक्षा की गई।