पार्टी छोड़कर जा रहे थे सिंधिया, प्रियंका और राहुल होली खेलने में बिजी थे, किसी ने पूछा तक नहीं

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नई दिल्ली। शायर गुलजार की एक मशहूर त्रिवेणी है- उड़ जाते हुए अलविदा कहने को ? या पास बुलाने के लिए … मगर अफसोस 19 साल तक कांग्रेस का साथ निभाने के बाद सीनियर यंग लीडर 49 साल के ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को जब पार्टी छोड़ने का ऐलान किया तो ऐसा कुछ नहीं हुआ।
सिंधिया ने होली के दिन दोपहर 12.10 बजे इस्तीफे की चिट्ठी ट्वीट कर दी। दिलचस्प बात यह रही कि ये चिट्ठी 9 मार्च को ही लिख ली गई थी। महज 20 मिनट बाद कांग्रेस ने उन्हें बर्खास्त भी कर दिया। इसके बाद 19 बागी विधायकों के इस्तीफे ग्रुप फोटो के साथ सामने आ गए। घटनाक्रम इतनी तेजी से बदला कि लगा कि सबकुछ पहले से तय लिखी स्क्रिप्ट के हिसाब से हो रहा था।

इससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह रही कि जिन ज्योतिरादित्य को पूरी ब्रिगेड शांत बनी रही। इस ब्रिगेड में सिंधिया के साथियों में सचिन पायलट, मिलिंद देवड़ा, दीपेन्द्र हुड्डा, कुलदीप विश्नोई, जितिन प्रसाद, आरपीएन सिंह, गौरव गोगोई, सुष्मिता देव, ज्योति मिर्धा और अदिति सिंह का नाम आता है। ये सभी ऐसे युवा नेता है, जिन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद किनारे कर दिया था , लेकिन तीन राज्यों और महाराष्ट्र में मिली सत्ता के बाद ये सभी मुखर हो गए थे।
अगस्त 2019 में जब कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया, तब इनमें से कई नेताओं ने पार्टी लाइन से हटकर मोदी सरकार की कार्रवाई के समर्थन में बयान दिए थे। राहुल गांधी के ट्विटर हैंडल से मंगलवार को सुबह 9 बजकर 25 मिनट पर होली की बधाई का टुवीट किया गया।
इसके बाद पूरे दिनभर राहुल की ओर से न तो कोई ट्वीट किया गया और न ही कोई बयान आया। राहुल हमेशा की तरह बैकग्राउंड में रहकर चुपचाप सब देखते रहे।
प्रियंका गांधी के ट्विटर हैंडल से मंगलवार को सुबह 8 बजकर 26 मिनट पर होली की बधाई का ट्वीट किया सिंधिया और प्रियंका लम्बे समय से साथ काम रहे थे। उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव का जिम्मा भी दोनों ने मिलकर उठाया था, लेकिन अपने साथी के रूठकर चले जाने पर प्रियंका ने भी चुप्पी साधे रखी। सचिन पायलट ने भी मंगलवार को ऐसा कोई संकेत नहीं दिया कि उन्हें अपने साथी के साथ छोड़ जाने की फिक्र है। सोमवार रात को सिंधिया और पायलट की बातचीत की खबर जरूर आई थी, लेकिन फैसले के दिन मंगलवार को ट्वीट किए- एक होली की बधाई, दूसरा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के स्थापना दिवस की बधाई और तीसरा अपने साले उमर अब्दुल्ला के 50वें जन्मदिन की बधाई का था। पूरे दिन यही अफवाहें जोरों पर रही कि सिंधिया के बाद पायलट भी पाला बदल सकते हैं। जितिन प्रसाद ने आखिरी ट्वीट 8 मार्च को किया था और आगे के दोनों दिन यह युवा चुप बना रहा। 8 मार्च को उन्होंने दिवंगत कांग्रेस नेता और अपने पिता के साथी पूर्व कानून मंत्री हंसराज भारद्वाज के निधन पर शोक जताया था, लेकिन बाद के 48 घंटों में सिंधिया को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
नेता मिलिंद देवड़ा को भी सिंधिया का करीबी कहा जाता है लेकिन वे भी चुप ही रहे। मिलिंद ने अपने टूविटर हैंडल पर सुबह होली की बधाई दी और शाम को महाराष्ट्र की समाज सुधारक सावित्री बाई फुले की पुण्यतिथि पर ट्वीट किया, लेकिन ज्योतिरादित्य को लेकर कुछ नहीं कहा। उल्टे, सोशल मीडिया में खबरें चलती रहीं कि अब महाराष्ट्र में सरकार गिराने का काम मिलिंद देवड़ा करेंगे। आरपीएन सिंह ने सिंधिया के इस्तीफे से ठीक पहले 10 बजकर 8 मिनट पर होली का बधाई संदेश जारी किया, लेकिन उसके बाद न तो वे मीडिया के सामने आए और न ही किसी तरह से अपनी बात रखी। गौरव गोगोई ने तो और कमाल किया। पूरे दिन शांत रहने के बाद देर रात सिर्फ एक ट्वीट किया और वह भी अपने मित्र सिंधिया के पक्ष या खिलाफ में नहीं बल्कि देश में हवा की क्वालिटी पर था.