सहारनपुर : योगी सरकार की छवि धूमिल करने संबंधी दूधली हिंसा से जुड़ा मुकदमा भी होगा वापस

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सहारनपुर । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार की सबसे ज्यादा छवि को धूमिल करने संबंधी सहारनपुर का सड़क दूधली हिंसा से जुड़ा मुकदमा भी वापस लिए जाने के प्रयास तेज हो गए हैं। महानगर भाजपा के पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ नेता राजीव गुंबर ने मंगलवार को बताया कि पार्टी कार्यकत्र्ताओं के जबरदस्त दबाव के चलते उन्होंने मुकदमा वापसी के लिए उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और कानून मंत्री बृजेश पाठक को मुकदमा वापसी संबंधी मांग के साथ सभी जरूरी कागजात सौंप दिए हैं।

विधायक गुंबर ने बताया कि 20 अप्रैल-2017 को मुस्लिम बहुल दलित गांव सड़क दूधली में अंबेडकर शोभा यात्रा निकालने को लेकर भाजपा जनप्रतिनिधियों और कार्यकत्र्ताओं का सड़क दूधली गांव के मुस्लिम समुदाय से हिंसक टकराव हो गया था। टकराव के दौरान तत्कालीन एसएसपी लव कुमार और डीएम सफक्कत कमाल, डीआईजी जितेंद्र शाही और कमिश्नर एमपी अग्रवाल मूकदर्शक बने रहे थे।

यहां तक कि उपद्रवियों ने सरकारी गाड़ी को भी क्षतिग्रस्त कर दिया था। भाजपा नेताओं को शोभा यात्रा को बीच में छोड़कर भागने को मजबूर होना पडा था। जिससे नाराज भाजपा सांसद लखनपाल शर्मा की अगुवाई में उनके खुद के भाई राहुल लखनपाल शर्मा, भाजपा महानगर अध्यक्ष अमित गगनेजा, भाजपा के गंगोह के विधायक प्रदीप चैधरी, देवबंद विधायक बृजेश रावत समेत सैकड़ों भाजपाइयों ने एसएसपी लव कुमार वर्मा की कोठी में घुसकर उपद्रव और हिंसा की थी। शासन के निर्देश पर पुलिस ने इन नेताओं को नामजद करते हुए मुकदमा अपराध संख्या 87/2017, 88/2017, 89/2017, 90/2017, 91/2017 और 95/2017 दर्ज किए गए थे।

इस मुकदमें में पुलिस ने भाजपा सांसद के कई करीबियों को जेल की हवा खिलाई थी। सांसद और विधायकों को गैरजमानती वारंट जारी करवाए थे। ध्यान रहे, मामले एसएसपी की कोठी ने भाजपाइयों के उपद्रव करने का मामला जैसे ही मुख्यमंत्री आदित्यनाथ तक पहुंचा तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए सांसद को एसएसपी कोठी तत्काल छोड़ने के निर्देश दिए थे। बाद में भाजपा सांसद को मुख्यमंत्री समेत आला भाजपा नेताओं से माफी मांगने को मजबूर होना पड़ा था। विपक्षी दल के नेता अभी भी इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री और सरकार पर राजनीतिक हमले कर रहे हैं।

सहारनपुर के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े पूर्व महानगर भाजपा विधायक राजीव गुंबर ने कहा कि राज्य सरकार ने राजनीतिक मुकदमों को वापसी लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उसी प्रक्रिया के तहत जिले के तमाम भाजपा नेताओं और कार्यकत्र्ताओं के आग्रह पर उन्होंने उपमुख्यमंत्री और कानून मंत्री से इस महत्वपूर्ण मुकदमें की वापसी की जोरदार मांग की है। यहां यह भी ध्यान देने की बात है कि सड़क दूधली प्रकरण के बाद जिले के शब्बीरपुर गांव में दलितों और राजपूतों के बीच जातीय संघर्ष हो गया था। जिससे भाजपा की पूरे देश में किरकिरी हुई थी।

शब्बीरपुर हिंसा की प्रतिक्रिया में दलित भीमसेना ने सहारनपुर नगर में जबरदस्त गदर काटा था। दलित सेना का संस्थापक और अध्यक्ष अभी अपने साथियों के साथ जिला जेल में रासुका में निरूद्ध है। भीमसेना समेत तमाम दलित संगठन भाजपा सरकार को दलित विरोधी बताते हुए चंद्रशेखर की रिहाई की मांग कर रहे हैं। लेकिन सरकार टस-से-मस नहीं हो रही है।

ऐसे में निष्पक्ष लोगों का कहना है कि यदि सड़क दूधली प्रकरण के मुकदमें सरकार वापस लेती है और दलित नेताओं को जेल में ही बंद रखती है तो इससे दलितों और कमजोर वर्गों में जबरदस्त रोष पनपेगा। दलित नेता इस मामले में मुख्यमंत्री के फैसले पर पैनी निगाहें लगाए हुए हैं। दूसरी ओर, भाजपा नेताओं का कहना है कि यदि मुकदमें वापस नहीं लिए जाते हैं तो लोकसभा चुनाव में भाजपा को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।