जानिए देश में “लॉकडाउन” से क्या सम्बंध है “रामानंद सागर की रामायण” का ?

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कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए पूरे देश में 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई है। जिसकी वजह से हर कोई अपने घर में समय बिता रहा है। ऐसे में दूरदर्शन पर एक बार फिर मशहुर टीवी शो रामानंद सागर की ‘रामायण’ का प्रसारण होने जा रहा है। इस घोषणा के साथ ही घरों में बंद परिजनों की स्मृतियों की गठरियां खुलने लगी। मन मंजूषा से वो यादें निकलने लगी जो सुनहरी किनारों से सजी चुनरी की तरह थीं।

जब देश में हो जाता था लॉकडाउन तब दिखाई जाती थी रामानंद सागर की रामायण

इसकी लोकप्रियता का यह आलम था कि रविवार सुबह जब इसका प्रसारण टेलीविजन पर होता था तब पूरा देश थम जाता था। सड़के सूनी हो जाती थी। रिक्शा वाले कहीं जाने को तैयार नहीं होते थे। दुकानदार दुकानें नहीं खोलते थे। एक तरह से देश में लॉकडाउन हो जाता था।

पूरा परिवार नहा कर भक्ति भाव से इसे देखता था। इसे देखते समय चप्पल-जूते नहीं पहनते थे लोग। उस समय हर घर में टीवी नहीं हुआ करता था। टीवी घर में होना बहुत बड़ी बात हुआ करती थी। ऐसे में जिसके घर टीवी होता था उसके घर के आसपास रहने वाले लोग यह धारावाहिक देखने आया करते थे। एक घर में 40 से 50 लोग यह धारावाहिक देखते थे।

कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु में हिंदी नहीं जानने वाले लोग भी इसे देखते थे। मुस्लिमों में भी यह धारावाहिक बहुत लोकप्रिय था। इस धारावाहिक में अरुण गोविल ने राम और दीपिका चिखलिया ने सीता की भूमिका निभाई थी। ये दोनों इतने लोकप्रिय हो गए कि लोग इन्हें ही राम और सीता मान कर पूजा किया करते थे। हनुमान, दारासिंह बने थे और रावण की भूमिका अरविंद त्रिवेदी ने अदा की थी।

बता दें कि हाल ही में ‘रामायण’ को लेकर केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ट्वीव कर बताया कि एक बार फिर दूरदर्शन पर रामानंद सागर की रामायण का प्रसारण किया जाएगा। उन्होंने ट्वीट कर लिखा-

जनता की मांग पर कल शनिवार 28 मार्च से ‘रामायण’ का प्रसारण पुनः दूरदर्शन के नेशनल चैनल पर शुरू होगा। पहला एपिसोड सुबह 9.00 बजे और दूसरा एपिसोड रात 9.00 बजे होगा।’

ना जाने कितने घरों में टीवी, मोहल्ले के कई-कई घरों का सहारा था। सब मिलबैठ कर एक साथ टीवी देखते थे। कई सारे हंसी-ठहाके भी उसमें शामिल होते थे और समझाइश भी, धर्म भी आध्यात्म भी… बहस भी और ज्ञान की गंगा भी… राम के पक्षधर और सीता के पक्षधर। कभी दीपिका के उच्चारण दोष पर सात्विक सी खिन्नता तो कभी लक्ष्मण के गुस्से पर उमड़ा ढेर सारा लाड़…. उन दिनों लक्ष्मण कई कुंवारियों के हीरो बन गए थे…।

इस सीरियल में राम, सीता और लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले कलाकारों ने लोगों के दिल में ऐसा असर छोड़ा था कि असल जिंदगी में भी उन्हें पूजने लगे थे। हाल ही में एक कॉमेडी शो में इस शो के किरदार राम, सीता और लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले कलाकार अरुण गोविल, दीपिका चिखलिया और सुनील लहरी पहुंचे थे।

 

इस दौरान उन्होंने सीरियल से जुड़े कई दिलचस्प किस्से साझा किए। अरुण गोविल ने बताया कि वे राम के किरदार के ऑडिशन के लिए पहुंचे तो वो रिजेक्ट हो गए थे।

अरुण गोविल ने बताया कि ‘मैं सागर प्रोडक्‍शन में ‘विक्रम-बेताल’ सीरियल कर रहा था। मुझे पता चला कि रामानंद सागर जी रामायण बना रहे हैं। मैंने उनसे कहा कि मैं ‘राम’ का किरदार करना चाहता हूं। उन्‍होंने मुझे ऑडिशन के लिए बुला लिया। मैंने ऑडिशन दिया और उन्‍होंने मुझे देखते ही रिजेक्‍ट कर दिया।

इसके कुछ महीनों बाद उनका मुझे फोन आया कि मिलने आ जा। मैं उनसे मिलने पहुंचा तो उन्‍होंने मुझसे कहा, ‘‍सिलेक्‍शन कमेटी का मानना है कि हमें तुमसे अच्‍छा राम नहीं मिल सकता।

वहीं दीपिका ने ‘रामायण’ में सीता का किरदार निभाया था। उन्होंने बताया, ‘उस दौरान मैं सीरियल विक्रम और बेताल कर ही थी। जहां शूटिंग हो रही थी वहां देखा कि कुछ बच्चे खेल रहे हैं। मैंने पूछा कि यहां क्या चल रहा है तो बताया गया कि लव-कुश की कास्टिंग हो रही है। उन्होंने आगे कहा कि एक दिन रामानंद सागर का फोन आया कि तुम भी आ जाओ सीता के रोल के लिए तुम्हारा ऑडिशन ले लेते हैं।

उन्होंने कहा, मैंने उनसे कहा कि मैं आपके साथ दो-तीन सीरियल कर रही हूं। इसके बाद भी आपको मेरा ऑडिशन लेना पड़ेगा। इस पर रामानंद ने कहा कि सीता ऐसी लगनी चाहिए कि स्क्रीन पर आए तो इंट्रोड्यूस ना करना पड़े। इस तरह चार-पांच स्क्रीन टेस्ट के बाद मेरा सेलेक्शन किया गया।

1982 के एशियाड खेलों की मेजबानी भारत को मिली तो इसके आयोजन के पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारत में टेलीविजन की पहुंच को व्यापक बनाने का फैसला लिया। टेलीविजन भारत के कई लोगों तक पहुंच गया। तब जरूरत पड़ी ऐसे कार्यक्रमों की जो मनोरंजक होने के साथ-साथ शिक्षाप्रद भी हों।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारी एसएस गिल ने फिल्म निर्माता-निर्देशक रामानंद सागर से ‘रामायण’ और बीआर चोपड़ा से ‘महाभारत’ आधारित टेलीविजन धारावाहिक बनाने को कहा।

रामानंद सागर अनेक सफल फिल्म बना चुके थे और उस दौर में उनकी कुछ फिल्में असफल रही थीं। तब दूरदर्शन के लिए काम करना अच्छा नहीं माना जाता था। फिल्मों के पिटने से संभवत: सागर निराश थे और उन्होंने दूरदर्शन पर रामायण दिखाने की बात को मान लिया। तय हुआ कि प्रति रविवार एक एपिसोड दिखाया जाएगा और 52 एपिसोड में पूरी रामायण को समेटना होगा।

लेकिन रामायण इस कदर लोकप्रिय हुई कि 78 एपिसोड तक इसे दिखाया गया। 25 जनवरी 1987 को पहला एपिसोड प्रसारित हुआ और 31 जुलाई 1988 को अंतिम। 

रामायण ने रामानंद सागर का कायाकल्प कर दिया। उन्होंने इस सीरिज से न केवल धन कमाया बल्कि अपार लोकप्रियता हासिल की। 55 देशों में इसे टेलीकास्ट किया गया और 650 मिलियन से भी अधिक व्यूअरशिप इसे मिली। भारत में सबसे ज्यादा देखी जाने वाली यह सीरिज बनी।

सोशल मीडिया पर मांग थी कि इसे फिर से दिखाया जाना चाहिए। कोरोना वायरस के आतंक के कारण लोग घर पर हैं इसलिए दूरदर्शन पर इसे पुर्नप्रसारित किया जा रहा है। 28 मार्च से सुबह 9 और रात 9 बजे इसे दूरदर्शन पर देखा जा सकता है।