जिस दोस्त के साथ राणा कपूर ने शुरू किया यश बैंक सबसे पहले उसी को दिया धोखा

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मुंबई. यस बैंक (Yes Bank) की अर्श से फर्श तक की कई कहानियां आपने पढ़ी होगी. लेकिन यहां आज हम आपको बताने जा रहे हैं बैंक के फाउंडर राणा कपूर (Rana Kapoor) की वो कहानी जिसे जान कर आप हैरान हो जाएंगे. ये कहानी पूरी फिल्मी है. जहां साथ काम करने वाले दोस्त बनते है और फिर ये दोस्ती रिश्तेदारी में बदल जाती है. दोस्त की मौत के बाद कहानी में दिलचप्स मोड़ आता है जहां दिखता है धोखेबाज़ी और तकरार.

ऐसे हुई दोस्ती की शुरुआत
दो कपूर की लड़ाई की कहानी साल 2008 के बाद शुरू होती है. उससे पहले ये समझना जरूरी है कि आखिर यस बैंक की शुरूआत कैसे हुई. ये बात 1999 की है. अशोक कपूर (ABN Amro Bank के पूर्व कंट्री हेड) हरक्रित सिंह ( पूर्व कंट्री हेड Deutche Bank)और राणा कपूर (पूर्व प्रमुख कॉर्परेट और फाइंनेस ANZ Grindlays Bank) ने रोबोबैंक के साथ मिलकर नॉन बैंकिंग फाइंनेंस कंपनी की शुरूआत की. बाद में हरक्रित सिंह इससे बाहर निकल गए. साल 2003 में अशोक और राणा कपूर को बैंक चलाने की लिए लाइसेंस मिला. साल 2004 में यस बैंक की शुरूआत हुई. अशोक कपूर बैंक के चेयरमैन बने जबकि राणा को बैंक का एमडी बनाया गया. बैंक ने ग्राहकों के सेविंग अकाउंट पर 6 परसेंट का ब्याज दर देना शुरू किया. लिहाजा कुछ ही सालों में बैंक के पास लाखों ग्राहक पहुंच गए. बैंक बड़े कंपनियों को ऊंचे दर पर लोन देती थी.

दोस्त से बने रिश्तेदारइसी दौरान अशोक कपूर और राणा कपूर की दोस्ती रिश्तेदारी में बदल गई. अशोक की पत्नी मधु कपूर की बहन से राणा कपूर ने शादी कर ली. अब ये दोनों कपूर दोस्त से साढू बन गए. अशोक कपूर के दो बच्चे हैं. बेटी शगुन और बेटा गौरव. जबकि राणा कपूर की तीन बेटिया हैं. सब कुछ बढ़िया चल रहा था. बैंक तेजी से तरक्की के रास्ते पर आगे बढ़ रही थी. लेकिन साल 2008 में मुंबई हुए 26/11 हमले ने कहानी बदल दी. अशोक कपूर की आतंकी हमले में मौत हो गई. वो ट्राइडेंट होटल में ठहरे थे.

मौत के बाद दुश्मनी!
अशोक की मौत के बाद उनकी पत्नी ने अपनी बेटी को बैंक में डायरेक्टर बनाने का प्रस्ताव रखा. लेकिन बैंक ने ये कहते हुए उनकी दावेदारी खारिज कर दी कि वो आरबीआई के गाइडलाइंस को पूरा नहीं करती. मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा और साल 2015 में फैसला अशोक कपूर के हक में सुनाया गया. इससे पहले साल 2012 में राणा कपूर ने अपने बैंक का इतिहास छपवाया जहां उसने अशोक कपूर का कोई ज़िक्र किया.