प्राचार्य डी.एस.पुट्टा और अधीक्षक रमेश दीन बैगा निलंबित

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शहडोल@ कमिश्नर शहडोल संभाग बी.एम.शर्मा द्वारा शासकीय कार्यों में उदासीनता एवं लापरवाही बरतने के कारण मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण नियंत्रण तथा अपील) नियम 1956 के नियम 09 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये डी.एस.पुट्टा प्राचार्य एवं रमेश दीन बैगा छात्रावास अधीक्षक (सहायक शिक्षक) शासकीय ज्ञानोदय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शहडोल (विचारपुर) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया हैं। निलंबन अवधि में पुट्टा एवं बैगा का मुख्यालय कार्यालय संभागीय उपायुक्त आदिवासी तथा अनुसूचित जाति विकास शहडोल संभाग शहडोल नियत किया गया है। निलंबन अवधि में नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

कमिश्नर द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि शासकीय ज्ञानोदय विद्यालय विचारपुर जिला शहडोल का भवन निर्माणाधीन होने से यह संस्था एकलव्य आदर्श आवाशीय विद्यालय शहडोल (धुरवार) के बालक छात्रावास भवन में संचालित था। ज्ञानोदय विद्यालय का भवन निर्माण कार्य पूर्ण होने से ज्ञानोदय विद्यालय 27 अफ्रैल 2017 को अपने नवनिर्मित स्थान ग्राम विचारपुर में स्थानांतरित हो गई। एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय धुरवार को रिक्त करने पर छात्रों द्वारा आवासीय विद्यालय में तोड़फोड़ एवं कमरो को क्षतिग्रस्त किया गया, जिसके संबंध में प्राचार्य, एकलब्य आदर्श आवासीय विद्यालय सोहागपुर, धुरवार द्वारा सहायक आयुक्त आदिवासी विकास, जिला-शहडोल को सूचित किया गया। प्राप्त सूचना के आधार पर कलेक्टर शहडोल के द्वारा प्रेषित प्रतिवेदन में लेख किया गया कि फोटो ग्राफ देखने से प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि यह तोड़फोड़ जानबूझकर की गई है। उदाहरण के लिये बाथरूम की टाईल्स तोड़कर शौचालय की सीट पर भर दी है।

स्पष्ट है कि स्थानांतरण के समय ज्ञानोदय विद्यालय के प्राचार्य पुट्टा एवं ज्ञानोदय बालक छात्रावास के अधीक्षक रामदीन बैगा द्वारा लापरवाही बरती गई है। संभागीय उपायुक्त आदिवासी तथा अनुसूचित जाति विकास संभाग शहडोल द्वारा सहायक यंत्री कार्यालय, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास जिला शहडोल से तकनिकी जांच कराये जाने पर 1 लाख 45 हजार की क्षति होना प्रतिवेदित किया गया है। चूंकि पुट्टा उक्त संस्था के प्राचार्य थे इसलिये संस्था परिवर्तन के समय उनका यह दायित्व था कि एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय सोहागपुर धुरवार के शासकीय भवन में किसी प्रकार की क्षति न पहुँचाई जाए, इसका ध्यान रखा जाना चाहिए था, लेकिन पुट्टा एवं बैगा द्वारा ऐसा न किया जाकर अपने उत्तरदायित्वों के निर्वहन में उदासीनता व लापरवाही बरती गई है। जो मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 के तहत कदाचार की श्रेणी में आता है।