प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाक़ात आज

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ब्रिक्स में पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कामयाबी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाक़ात करेंगे। बैठक से क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक शांति को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

इससे पहले कल नौवें ब्रिक्‍स शिखर सम्‍मेलन में घोषणापत्र जारी किया गया। ब्रिक्स के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब आतंकवाद की कड़े शब्दों में निंदा की गई हो। इस दौरान पाकिस्‍तान का सीधे तौर पर नाम तो नहीं लिया गया है, लेकिन उसकी जमीन से जो संगठन काम करते हैं, उनका साफतौर पर जिक्र किया गया है। पाकिस्‍तान स्थित लश्‍कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्‍मद और तहरीके तालिबान पाकिस्‍तान साहित अलकायदा, हक्‍कानी नेटवर्क और आई एस आई एस का नाम लेकर चिंता प्रकट की गई

चीन के शियामेन में शुरु हुए ब्रिक्स शिखर सममेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद का मसला जोर-शोर से उठाया इस मसले पर सदस्य देशों से एकजुट होकर काम करने की अपील की। पीएम की बातों का सम्मेलन में खास असर हुआ और इसका परिणाम ये हुआ कि ब्रिक्स शियामेन 2017 के घोषणापत्र में आतंकवाद का जिक्र प्रमुखता से किया गया। सम्मेलन में पाकिस्तान को जोर का झटका देते हुए ब्रिक्स देशों ने न केवल आतंकवाद की एक सुर में निंदा की बल्कि घोषणा पत्र में उसक धरती पर फल फूल रहे लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मुहम्मद और हक्कानी नेटवर्क जैसे संगठनों की हिंसा पर चिंता जाहिर की गयी ।

इस घोषणापत्र में कुल 10 आतंकी संगठनों का जिक्र है। इनमें तालिबान, आईएस, अल-कायदा, ईस्टर्न तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट, इस्लामिक मूवमेंट ऑफ उजबेकिस्तान, हक्कानी नेटवर्क, जैश-ए-मोहम्मद, तहरीके तालिबानी पाकिस्तान, हिज्ब उत तहरीर और लश्कर-ए-तैयबा शामिल है ।

साफ है कि इन 10 संगठनों में से कई संगठन ऐसे हैं जिनका सीधा संबंध पाकिस्तान से है। इससे पहले कहा जा रहा था कि चीन ने ब्रिक्स में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का जिक्र नहीं करने की बात कही थी लेकिन आखिरकार भारत की कूटनीति ने रंग दिखाया और सभी ब्रिक्स नेताओं ने एक सुर से आतंकवाद की कड़ी निंदा की। ब्रिक्स शियामेन घोषणापत्र के 49 वें पैराग्राफ में दुनिया भर में हुए आतंकी हमलों की कड़ी निंदा की गयी है। आतंकवाद के हर रुप और तरीके की निंदा की निंदा करते हुए इसमें कहा गया है कि आतंकवाद को किसी भी तरह से स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

घोषणापत्र कहता है – हम इस बातका संकल्प लेते हैं कि आतंकवादी कृत्यों को करने, फैलाने या फिर उसे सहयोग करने के लिए जिम्मेदार लोगों को निश्चित तौर जवाबदेह बनाना है। आतंकवाद को रोकने और उसका मुकाबले करने में देशों की अहम भूमिका है

घोषणापत्र में इस बात का भी जिक्र किया गया कि आतंक के खिलाफ दुनिया के सभी देशों को मिल जुलकर लड़ना होगा, और यह जिम्मेदारी किसी एक देश की नहीं सभी देशों की है। साथ ही सदस्य देशों ने आतंकवाद से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक समझौते को जल्द से जल्द स्वीकार करने की भी अपील की गयी है । दुनिया के देशों से भी कहा गया है कि वो आतंकवाद से निपटने के लिए आतंक की फंडिंग पर भी चोट करें ।

इसके अलावा सदस्य देशों ने एक साथ उत्तर कोरिया द्वारा किए परमाणु परीक्षण की भी निंदा की है। कुल मिलाकर घोषणापत्र से साफ हो गया कि आतंकवाद के मुद्दे पर भारत दुनिया के सामने अपना पक्ष रखने में सफल रहा। गौरतलब है कि चीन लगातार पाकिस्तान समर्थक आतंकी संगठनों और आतंकवादियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवादी घोषित करने में अड़ंगा लगाता रहा है, लेकिन ब्रिक्स के घोषणापत्र में इनका जिक्र होना भारत के लिए बड़ी सफलता है।