1949 से प्रतिवर्ष निकली जा रही प्रभात फेरी

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By: Manju Tiwari

जबलपुर @ संस्कारधानी मे चाहे कोई भी पर्व या तीज त्योहार हो बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है इसी क्रम मे प्रतिवर्ष परंपरा अनुसार इस वर्ष भी मीरा दीदी और बाबा संत सिंह के सानिध्य मे भरतीपुर ओमती स्थित गुरूद्वारा से प्रभात फेरी निकाली गई । गुरुपर्व के दौरान ही सुबह 5 बजे प्रभात फेरी निकली जाती है, प्रभात फेरी में सभी वर्ग के युवा, बुजुर्ग, बच्चे एवं महिलायें शामिल रहीं जिनमे मीरा दीदी, बाबा संत सिंह, नीतू दीदी, प्रकाश सदाना, गुलशन, गौरव सिंह , दीपक खत्री, प्रकाश, कन्हैयालाल, रमेश पुरुस्थानी, नंदलाल कुंनगानी, पारुमल रिजवानी, संजय पापुलर, सुनील तिवारी आदि शामिल रहे । सभी मे खासा उत्साह देखा गया। बताया गया कि प्रभात फेरी में प्रभात का अर्थ सुबह के समय से है, यानी कि सुबह 4 बजे के बाद जो समय है वह प्रभात का है। तथा फेरी का मतलब होता है आसपास घूमना… इसलिए प्रभात फेरी वह है जब सुबह के समय कुछ लोग एकत्रित होकर अपने आसपास के इलाके में घूमते हैं। सुबह के उस गहरे कोहरे में भी सिख संगतें गुरुबाणी-कीर्तन करते हुए गलियों से गुजरते हैं। प्रभात फेरी एक धार्मिक कार्य है जो मन की शांति के लिए किया जाता है। यह प्रभात फेरी 1949 से निरंतर प्रतिवर्ष निकाली जा रही है। कहा जाता है कि जिस किसी कि भी मनोकामना पूरी होती है वो प्रभात फेरी के सदस्यों को अपने घर आमंत्रित कर अपनी श्रद्धानुसार प्रसाद आदि का वितरण करते है ।

धार्मिक कारण
धार्मिक रूप से प्रभात फेरी को प्रार्थना से जोड़ा जाता है, जिसके अनुसार प्रभात फेरी के दौरान आसपास के क्षेत्र में घूमते हुए परमात्मा के उपदेशों को पढ़ा जाता है और लोगों को भी प्रभात फेरी में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जाता है।

सिख धर्म में प्रचलित
यूं तो प्रभात फेरी का इतिहास काफी पुराना है, लेकिन खासतौर से सिख धर्म में प्रभात फेरी को अधिक अहमियत मिली है। आज भी सिख संगत गुरुपर्व के आने से कुछ दिन पहले ही प्रभात फेरियां आरंभ कर देते हैं, ताकि सुबह सुबह घूमकर सिख गुरुओं की सीख को लोगों तक पहुंचाया जाए।

गुरुपर्व के दौरान
आप गांव में रहते हैं या शहरों में, लेकिन सिख धर्म की नींव रखने वाले गुरु नानक देव जी एवं सिख धर्म को खालसा का रूप देने वाले दसवें नानक गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश उत्सव के पास आपको सुबह-सुबह प्रभात फेरी की आवाज़ें जरूर सुनाई देती होंगी।

क्या है प्रभात फेरी का उद्देश्य ?
कुछ लोगों का मानना है कि प्रभात फेरी का मकसद उन आलसी लोगों को सुबह समय से जगाना भी है जो अपने स्वार्थ के लिए भगवान को भूल चुके हैं। सुबह का समय भगवान को याद करने का होता है, ताकि आने वाला जीवन अच्छा बीते लेकिन कुछ लोग अपने आलस्य के चक्कर में आराधना से दूर होते जा रहे हैं।

क्या आप कभी गए हैं ?
कारण कुछ भी हो, लेकिन यदि आपको कभी भी प्रभात फेरी में शामिल होने का मौका मिले तो जरूर जाएं। यह एक अच्छा अनुभव होगा।