पीएम ने तकनीक के सही इस्तेमाल पर दिया ज़ोर

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- प्रौद्योगिकी विकास का माध्यम होना चाहिए, ना कि विनाश का, पीएम ने दुबई में विश्व सरकार सम्मेलन को किया संबोधित, कहा- कुछ लोग तकनीक की मदद से साइबर स्पेस का कर रहे हैं बेजा इस्तेमाल।

ओमान जाने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई में कल छठे विश्व सरकार सम्मेलन में हिस्सा लिया। भारत इस सम्मेलन में अतिथि देश के रूप में मौजूद था। प्रधानमंत्री ने सम्मेलन में विश्व को तक़नीक़ का सभी के विकास के लिए इस्तेमाल करने पर ज़ोर दिया। प्रधानमंत्री ने भारत में तक़नीक़ के ज़रिए सुशासन और वंचितों का विकास करने की भी बात कही। उन्होने कहा कि उनकी सरकार सबका साथ और सबका विकास के सिद्धान्त के ज़रिए लगातार काम कर रही है। पीएम ने कहा कि विकास के लिए तक़नीक़ ने अहम भूमिका निभाई है। लेकिन कुछ लोग तकनीक की मदद से साइबर स्पेस का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं।

पीएम ने डिज़िटल युग में विश्व के देशों के साथ सूचनाओं को मानव विकास के हित में आदान-प्रदान करने पर ज़ोर दिया। उन्होने आधार के ज़रिए भारत में कई योजनाओं में धन के दुरूपयोग पर क़ाबू पाने का भी ज़िक्र किया। सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री ने गल्फ कॉपरेशन काउंसिल देशों के कारोबारियों से मुलाक़ात भी की और भारत हो रहे बदलाव की बात साझा की।

तकनीक और प्रोद्योगिकी सुशासन, आर्थिक वृद्धि और समान विकास का ज़रिया हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यही संदेश दुनिया भर के नेताओं के साथ छठे विश्व सरकार सम्मेलन में साझा किया। उन्होंने साथ ही विकसित होती तक़नीक़ को विकास के लिए ही प्रयोग करने की अपील भी की। उन्होने यूएई का धन्यवाद करते हुए कहा कि तक़नीक़ का इस्तेमाल करने में यूएई दुनिया के देशों में काफी आगे है। साथ ही प्रधानमंत्री ने भारत में तक़नीक़ के ज़रिए सुशासन और वंचितों का विकास करने की भी बात कही। उन्होने कहा कि उनकी सरकार सबका साथ और सबका विकास के सिद्धान्त के ज़रिए लगातार काम कर रही है।

140 देशों के इस ख़ास सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया में मानवता के लिए आपसी संघर्ष से ज़्यादा सह जीवन की ज़रुरत है। उनहोंने डिज़िटल युग में विश्व के देशों के साथ सूचनाओं को मानव विकास के हित में आदान-प्रदान करने पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि विकास के लिए तक़नीक़ ने अहम भूमिका निभाई है। साथ ही उन्होने संतुलित और सभी के विकास पर ज़ोर दिया। उन्होने सौर ऊर्जा के क्षेत्र को और भी विकसित करने और दुनिया के ज़रूरतमंद देशों तक विभिन्न क्षेत्रों में तक़नीक़ का फायदा पहुंचाने की बात कही।

प्रधानमंत्री ने दुनिया में पिछले 200 सालों में तक़नीक़ के ज़रिेए आऐ आमूलचुल बदलाव का ज़िक्र किया। भारत की युवा आबादी के सामर्थ्य की बात कहते हुए उन्होने कहा कि अब तक़नीक़ के क्षेत्र में आगे बढ़ने की बारी भारत की है। उन्होने मंगल मिशन और दूसरी सेटेलाइट के ज़रिए भारत की बढ़ती तक़नीक़ी क्षमता का ज़िक्र किया। साथ ही कहा कि भारत सदियों पुराने सिद्धान्त है वसुधैव कुटुंबकम में विश्वास रखता है। यही वजह है कि भारत की तक़नीक़ी विकास का फायदा दूसरे देशों को भी हो रहा है।

सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री ने गल्फ कॉपरेशन काउंसिल देशों के कारोबारियों से मुलाक़ात भी की। प्रधानमंत्री ने भारत हो रहे बदलाव की बात साझा की। साथ ही उन्होने साढ़े तीन साल में हुए आर्थिक सुधारों की भी बात कही। प्रधानमतंत्री ने ट्वीट के ज़रिए जानकारी दी कि ” गल्फ कॉपरेशन काउंसिल देशों के कारोबारियों के साथ काफी सकारात्मक मुलाक़ात हुई। आर्थिक मामलों में गल्फ और पश्चिम एशिया के देशों के काफी आशान्वित हैं।”

साथ ही प्रधानमंत्री दुबई स्थित फ्यूचर म्यूज़ियम में विकसित तक़नीक़ को भी देखा। ये म्यूज़ियम भविष्य की चुनौतियों के मद्देनज़र आविष्कार और नई तक़नीक़ को इजाद करने का केन्द्र है। प्रधानमंत्री ने भारत के महान अविष्कारकों का ज़िक्र करते हुए कहा कि तक़नीक़ ही ऐसा माध्यम है जिसके ज़रिए सामान्य मानवीय कल्याण मुमकिन है। वजह यही है कि नए उभरते भारत में तक़नीक़ के ज़रिए ही तेज़ी के साथ संतुलित और समावेशी विकास किया जा रहा है।