पीएम मोदी करेंगे कई अहम बैठकों में शिरकत

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तीन देशों की यात्रा के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्टॉकहोम में भारत-नोर्डिक शिखर सम्मेलन और ब्रिटेन में राष्ट्रमंडल देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ करेंगे बैठक। इनोवेशन, तकनीक और शिक्षा के क्षेत्र पर रहेगा ज़ोर। पीएम 20 अप्रैल को जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल से भी करेंगे मुलाकात।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन देशों की यात्रा का मकसद व्यापार और निवेश तथा अन्य प्रमुख क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाना है। अपनी यात्रा के पहले चरण में प्रधानमंत्री स्टॉकहोम में पहले भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। सम्मेलन का विषय है साझा मूल्य आपसी समृद्धि ।

सोमवार देर शाम पीएम मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के लिए दिल्ली से रवाना हुए और उनकी ये यात्रा कई मामलों में बेहद खास होने जा रही है। पीएम मोदी की यात्रा का पहला पड़ाव है स्वीडन जहां वो 17 अप्रैल को पहले इंडिया-नोर्डिक शिखर सम्मेलन में शिरकत करेंगे। सम्मेलन का विषय है साझा मूल्य आपसी समृद्धि। स्वीडन, नॉर्वे, फिनलैंड, डेनमार्क और आइसलैंड देशों को सामूहिक रूप से नोर्डिक देश भी कहा जाता है। यात्रा पर रवाना होने से पहले पीएम ने फेसबुक पर नोर्डिक सम्मेलन के बारे में लिखा- ” भारत और स्वीडन मिलकर 17 अप्रैल को स्टॉकहोम में भारत-नोर्डिक सम्मेलन आयोजित करेंगे जिसमें फिनलैंड, नार्वे, डेनमार्क और आइसलैंड के प्रधानमंत्री हिस्सा लेंगे । स्वच्छ प्रौद्योगिकी पर्यावरण मुद्दों के समाधान, बंदरगाह आधुनिकीकरण, कोल्ड चेन, कौशल विकास और इनोवेशन में नोर्डिक देशों की ताकत का लोहा विश्व मान चुका है। नोर्डिक की ये क्षमताएं भारत को बदलने के हमारे विजन में सटीक बैठती है.”

दरअसल ये पांचों देश सिर्फ तकनीकी तौर पर दुनिया के अग्रणी देश नहीं है, बल्कि हैप्पीनेस इंडेक्स में शीर्ष स्थान पर है। भारत इन देशों से बहुत कुछ हासिल करने की इच्छा रखता है। ये सम्मेलन भारत के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि इससे पहले यह सम्मान केवल अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को मिला था। उनके कार्यकाल के दौरान इस तरह नोर्डिक देशों के प्रमुखों के साथ अमेरिका-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ था. उसके बाद इस तरह का आयोजन दूसरी बार हो रहा है । इस लिहाज से भारत के लिए यह बड़ा मौका है कि इस क्षेत्र के 5 राष्ट्रप्रमुखों के साथ पीएम मोदी की अलग से द्विपक्षीय बैठक होगी। यात्रा के दौरान पीएम मोदी स्वीडन के प्रधानमंत्री स्टेफान ल्योव्हेन के साथ द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने पर बात करेंगे। स्वीडन के प्रधानमंत्री स्टेफान ल्योव्हेन के साथ बैठक में दोनों नेता जिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करेंगे उनमें – व्यापार, निवेश, इनोवेशन, विज्ञान और तकनीक, स्किल डेवलपमेंट, स्मार्ट सिटी, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटाइजेशन और स्वास्थ्य शामिल हैं ।

स्वीडन की अपनी यात्रा से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फेसबुक पर लिखा- ”भारत और स्वीडन के बीच दोस्ताना रिश्ता है. हमारी साझेदारी लोकतांत्रिक मूल्यों तथा खुले, समावेशी एवं नियमों की बुनियाद पर टिकी वैश्विक व्यवस्था के प्रति कटिबद्धता पर आधारित है. स्वीडन हमारे विकास पहलों में एक मूल्यवान साझेदार है.

” यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी मंगलवार को स्वीडन के राजा कार्ल गुस्ताफ (16वें) से मुलाकात करने के साथ स्वीडिश प्रधानमंत्री के साथ राउंड टेबल बातचीत और स्वीडिश कंपनियों के सीईओ से चर्चा भी करेंगे। स्वीडन यात्रा के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय समुदाय के लोगों को भी संबोधित करेंगे और उन्हें दूसरे देश में अपनेपन का अहसास कराएंगे। स्वीडन में करीब 20, 000 से ज्यादा भारतीय समुदाय के लोग रहते हैं। जो वहां के विकास में अपनी भागीदारी निभा रहे हैं। ये भारतीय पीएम की यात्रा को लेकर काफी उत्साहित हैं ।

पीएम मोदी के लिए यह दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि 1988 के बाद वह स्वीडन जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। भारत के मेक इन इंडिया अभियान को लेकर स्वीडन ने काफी सकारात्मक रुख अपनाया है। विश्व भारत को बड़े बाजार के रूप में देखता है और स्वीडन भी इससे अछूता नहीं है। शायद तभी यह वजह है कि 170 से ज्याजा स्वीडीश कंपनियां भारत में काम कर रही हैं।

स्वीडन के साथ भारत का व्यापार करीब 1.8 अरब डॉलर है जबकि नोर्डिक देशो के साथ भारत का कुल व्यापार करीब 5.3 अरब डॉलर का है। भारत का जोर इसे बढाने पर होगा। कुल मिलाकर स्वीडन की यात्रा में पीएम मोदी न केवल स्वीडन के साथ रिश्तों को नया आयाम देंगे बल्कि नोर्डिक देशों के साथ भारत की कूटनीतिक रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिश करेंगे।