स्वीडन, ब्रिटेन और जर्मनी की सफल यात्रा के बाद पीएम मोदी स्वदेश लौटे

शेयर करें:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों स्वीडन, ब्रिटेन और जर्मनी की सफल यात्रा के बाद स्वदेश लौट गए हैं। स्वीडन और ब्रिटेन की सफल यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी जर्मनी कल पहुंचे। प्रधानमंत्री मोदी ने कल जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल के साथ दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और प्रगाढ़ बनाने के तरीकों पर चर्चा की। जर्मनी की चांसलर के तौर पर चौथी बार मर्केल के पद भार संभालने के बाद से दोनों नेताओं के बीच यह पहली मुलाकात थी। पीएम मोदी की जर्मनी यात्रा भले ही 2 घंटे से कुछ ज्यादा समय की रही हो, लेकिन दोनों देशों के संबंधों के लिए बेहद खास रही।

जर्मनी की चांसलर के तौर पर चौथी बार मर्केल के पद भार संभालने के बाद से दोनों नेताओं के बीच यह पहली मुलाकात थी। प्रधानमंत्री मोदी की ये तीसरी जर्मनी यात्रा है। प्रधानमंत्री मोदी को एयरपोर्ट भी गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। जर्मन चासंलर एंजेला मर्केल ने पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। संबंधों में मजबूती की झलक इस दौरान देखने को मिली। दोनों नेता सबसे पहले साल 2015 में हनोवर मेस्सी में दुनिया के सबसे बड़े औद्योगिक मेले में मेक इन इंडिया के वैश्विक लॉन्च के मौके पर एक मंच पर आये थे।

मई 2017 में दोनों देशों के संबंधों में नयी उड़ान देखने को मिली जब भारत-जर्मनी अंतर सरकारी वार्ता के दौरान दोनों नेता मिले। दोनों देशों के बीच 12 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं। जर्मनी यूरोप में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। जनवरी 2000 से अबतक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मामले में जर्मनी सातवें नंबर पर आता है। जर्मनी के निवेशकों ने कई सेक्टरस में भारत में निवेश किया है।

इसमें परिवहन, विद्युत उपकरण, धातु उद्योग,केमिकल , सेवा क्षेत्र,निर्माण क्षेत्र और ऑटोमोबाइल क्षेत्र मुख्य रूप से शामिल हैं। जर्मन ऑटो इंडस्ट्री की दिग्गज कंपनियां भारत के बाजार में पहली ही उतर चुकी हैं। इसमें वोक्सवैगन, बीएमडब्लू और ऑडी जैसी कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों ने भारत में विनिर्माण संयंत्र भी स्थापित किए हैं। इसके अलावा दूसरी जर्मन कंपनियों की बात करें तो उसमें सीमेंस, बॉश, ड्यूश बैंक और लुफ्थांसा शामिल हैं।

पीएम मोदी के सत्ता संभालने के बाद भारत और जर्मनी के संबंधों में लगातार मजबूत हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जर्मनी भारत का अहम सहयोगी रहा है। भारत-जर्मनी में मजबूत द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग भी रहा है। भारत की अनेक क्षेत्रों में मौजूदा प्राथमिकताएं नवीकरणीय ऊर्जा, कौशल विकास, स्मार्ट सिटी, पानी और अपशिष्ट प्रबंधन, नदियों, रेलवे आदि की सफाई जैसे अधिकांश क्षेत्रों पर जर्मनी की विशेषज्ञता और अनुभव का लाभ मिल सकता है।