प्लास्टिक के तालाब ने बदली झरखेड़ा के किसानों की तकदीर

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शहडोल @ सीहोर जिले का झरखेड़ा गांव प्रदेश का ऐसा इकलौता गांव है, जहां किसान जल संरक्षण के अद्भुत नजारे पेश कर प्लास्टिक तालाब से लाभ कमा रहे हैं। कम वर्षा के कारण किसान गर्मी में खेती नहीं कर पा रहे थे। गांव के युवा किसान मनोहर पाटीदार ने पुणे में निर्मित प्लास्टिक के तालाब की तर्ज पर करीब आधा एकड़ में प्लास्टिक के तालाब का निर्माण किया है।

इसी तालाब के संग्रहित पानी से इन्होंने बीस एकड़ जमीन पर गर्मी के मौसम में सब्जियों की खेती की है। कृषक मनोहर पाटीदार ने उद्यानिकी विभाग के सहयोग से अपने खेत पर 45x45x10 मीटर आकार के तालाब का निर्माण करवाया। गाँव के लोगों ने मनोहर के नवाचार को शुरू में स्वीकार नहीं किया। उनके द्वारा खेत पर तालाब बनाते समय गांव के लोग व्यर्थ में रुपए बर्बाद करने की बात करते थे। अल्प बारिश के बाद जब लोगों ने मनोहर को पूरे साल इसी तालाब के पानी से खेती करते देखा, तो वे भी इनकी राह पर चल पड़े।

प्लास्टिक के तालाब (प्लास्टिक लाइनिंग ऑफ फार्म पौंड) अब झरखेड़ा के किसानों के लिये वरदान सिद्ध हो रहे हैं। मनोहर पाटीदार बताते हैं कि गांव में छोटे-बड़े कुल सौ किसान हैं। इन्हें जल संरक्षण और प्लास्टिक के तालाब से खेत पर साल भर पानी की सुविधा की यह युक्ति पसंद आई है। खेती में होने वाले लाभ के चलते उनके देखा-देखी गांव में एक दर्जन तालाब बन चुके हैं।

गांव के किसान तुलसीराम पाटीदार, सुरेश पाटीदार, बैधनाथ पाटीदार, हीरालाल पाटीदार, बाबूलाल पाटीदार, इंदर सिंह मेवाड़ा, गीता प्रसाद पाटीदार और राम सेवक पाटीदार ने प्लास्टिक तालाब को खेती के लिए वरदान बना लिया है। इसके अलावा गांव के डेढ़ दर्जन से अधिक किसान अपने-अपने खेतों पर प्लास्टिक तालाब का निर्माण कर रहे है। जो देखकर हंसते थे, अब मनोहर की राह पर चल पड़े हैं।

एक साल के भीतर ही उनके प्लास्टिक तालाब की लागत लगभग निकल चुकी है। उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को प्लास्टिक तालाब निर्माण कराने के लिये पचास प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। जिले में झरखेड़ा के अलावा खामलिया, आष्टा, इछावर और बामलादड़ में प्लास्टिक तालाब का निर्माण चल रहा है। विभाग द्वारा 100.55 रुपए प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से अधिकतम एक लाख 21 हजार 500 रुपए का अनुदान की सुविधा है।