अब दिन में चैन की नींद नहीं सो सकेंगे लोवर बर्थ के यात्री

शेयर करें:

ट्रेनों की आरक्षित बोगियों की निचली सीट के यात्री अब दिन में चैन की नींद नहीं सो सकेंगे। रेलवे ने आरक्षित बोगियों की निचली सीट पर सोने का फिर से समय तय किया है। यह रात 10 बजे से सुबह में 6 बजे तक निर्धारित है।

एसी सेकेंड व थर्ड बोगी में भी लागू सोने को लेकर रेलवे का यह नियम स्लीपर, थर्ड और सेकेंड एसी की बोगियों में एक तरह से लागू होंगे। रेलवे बोर्ड का यह आदेश कुछ दिन पहले ही चक्रधरपुर मुख्यालय में आया है।

इससे टाटानगर स्टेशन से गुजरने एवं खुलने वाली रोज की 43 जोड़ी ट्रेनों के सैकड़ों यात्रियों को सहूलियत होगी। हालांकि ट्रेनों में निचली सीट महिला, सीनियर सिटीजन, मरीज एवं दिव्यांग को ही अलॉट की जा रही हैं। नये नियम के अनुपालन कराने की जिम्मेदारी टिकट निरीक्षक (टीटीई) को सौंपी गई है।

हालांकि स्लीपर में जनरल के यात्री के चढ़ने पर रोक है, पर टाटानगर से घाटशिला, चक्रधरपुर, राउरकेला, चांडिल-पुरुलिया व मुरी की ओर जा रही ट्रेनों की स्लीपर बोगी में लोग हमेशा जनरल टिकट लेकर सवार स्लीपर में सवार होते हैं।

वेटिंग- आरसी वालों को राहत : रेलवे की ओर बोगियों में सोने का समय तय करने का सबसे ज्यादा वेटिंग टिकट वाले यात्रियों को मिलेगा। आमतौर पर ऐसे यात्रियों को निचली सीट पर सफर कर रहे आरक्षित टिकट वाले यात्री अपनी सीट पर बैठने नहीं देते थे। ऐसे यात्री अब में दिन में आराम से उस सीट पर बैठ सकेंगे।

बैठने के लिए होता था विवाद : आरक्षित बोगी में निचली सीट पर बैठने को लेकर आए दिन यात्रियों में विवाद होता है। निचली सीट के यात्री दोपहर में खुद सोने के लिए अपर और मिडिल सीट वाले किसी भी यात्री को बैठने नहीं देना चाहते हैं।

छोटानागपुर पैसेंजर एसोसिएशन के महामंत्री डॉ. अरुण तिवारी ने कहा कि ाात्रियों को आपस में सहयोग करना चाहिए। अपर और मिडिल सीट पर बैठने योग्य ऊचाई नहीं रहती है। लेकिन नीचे की सीट के यात्री (महिला, सीनियर सिटीजन, दिव्यांग व मरीज) को दिक्कत नहीं होनी चाहिए।