पाकिस्तान का नाम एफएटीएफ की ग्रे सूची में

शेयर करें:

पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डालने के वित्तीय निगरानी संस्था के फैसले का भारत ने किया स्वागत। पाकिस्तान ने अगर नहीं माने ग्रे सूची के नियम तो किया जा सकता है ब्लैक लिस्ट। भारत ने आतंकवाद रोधी वित्तीय निगरानी संस्था के फ़ैसले का स्वागत किया है।

पाकिस्तान को एफएटीएफ (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) की ’ग्रे लिस्ट’ में डालने की ख़बर मिली उसी रोज इसकी विरोधाभासी ख़बर भी आई है. इसके मुताबिक 2017 में स्विस बैंकों में पाकिस्तान का काला धन 21 फ़ीसद कम हो गया है जबकि भारत का 50 फ़ीसदी के लगभग बढ़ गया है. यहीं यह भी बताते चलें एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में उन देशों को रखा जाता है कि जो आतंक की फंडिंग और काले धन को सफेद करने की क़वायद पर लगाम लगाने में नाकाम रहते हैं.

वित्‍तीय कार्रवाई बल ने आतंकवादियों पर लगाम लगाने और लश्‍कर-ए-तैयबा, जमात उद दावा और जैश-ए – मोहम्‍मद जैसे आतंकवादी गुटों को आर्थिक मदद रोकने में विफलता के लिए पाकिस्‍तान को ग्रे लिस्‍ट यानी संदिग्‍ध देशों की सूची में डाल दिया है।

यह निर्णय पाकिस्तान द्वारा उसे ब्लैक लिस्ट करने से बचने के लिए करीब 15 महीने पहले मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के नेतृत्व वाले जमात-उद-दावा और उसके सहयोगी गुटों सहित आतंकवादी दलों को की जा रही फंडिंग को रोकने के लिए एफएटीएफ को 26 बिंदुओं की व्यापक कार्रवाई योजना प्रस्तुत करने के बाद आया है। पाकिस्‍तान ने इससे बचने के लिए 26 सूत्री कार्य योजना पेश की थी और अतंर्राष्‍ट्रीय वित्‍तीय प्रहरी के निर्णय को टालने के लिए पूरे कूटनीतिक प्रयास किये थे।