एक जिला एक उत्पाद योजना : मटर उत्पादक किसानों को दी गई उन्नत तकनीक की जानकारी

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जबलपुर। राज्य शासन की एक जिला-एक उत्पाद योजना के तहत चयनित मटर फसल के प्रति किसानों को प्रोत्साहित करने, उन्नत बीज की उपलब्धता व मार्केट लिंकेज आदि की जानकारी देने के उद्देश्य से कलेक्टर कर्मवीर शर्मा के निर्देश पर आज शनिवार को भेड़ाघाट चौराहे में कार्यशाला सह फसल प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया।

राष्ट्रीय बीज निगम एवं कृषि विभाग के द्वारा आयोजित कार्यशाला सह फसल प्रदर्शन कार्यक्रम में जिले के शहपुरा व पाटन के मटर उत्पादक कृषकों एवं फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के सदस्यों ने भागीदारी की। राष्ट्रीय बीज निगम भोपाल के क्षेत्रीय प्रबंधक गुलवीर सिंह ने कृषकों के लिये राष्ट्रीय बीज निगम द्वारा उत्पादक उन्नत व उत्कृष्ट बीजों की उपलब्धता के बारे में जानकारी देते हुये मटर की विभिन्न किस्मों की जानकारियां दी।

जबलपुर का मटर देश-विदेश में अपने स्वाद एवं गुणवत्ता के लिये एक ऊंचा स्थान रखता है यहां पर मटर की बोनी सितंबर माह से प्रारंभ होकर जनवरी माह तक होती है। प्रारंभ में जो बोनी होती है जिसकी पहली तुड़ाई से ही फसल ली जाती है इसके लिये काशी नंदिनी किस्म के बीजों की मांग रहती है जोकि कम अवधि में अच्छी फल्ली देती है। अक्टूबर माह में जो बोनी हुआ करती हैं उसमें मटर की फली आकार में बड़ी होती है एवं बहुत दिनों तक हरापन लिये रहती है जो कि बाहर के बाजार में बेचने के लिये उपयुक्त होती है।

जबलपुर जिले के किसान भारत के भिन्न-भिन्न क़ृषि विश्वविद्यालय व कृषि अनुसंधान केंद्रों से मटर के ब्रीडर सीड़ लाकर अपना स्वयं बीज उत्पादन का काम भी करते हैं। बीज उत्पादन की जानकारी देने के लिये चित्र को किसान कल्याण एवं कृषि विभाग एवं उद्यानिकी का अमला किसानों के सतत संपर्क में रहता हैं।

वर्तमान में भारत सरकार की एफपीओ योजना के अंतर्गत जबलपुर जिले में लगभग 7 एफपीओ गठित किये जा रहे हैं जिनमें से तीन-चार एफपीओ केवल मटर फसल के लिये काम करेंगे। इन एफपीओं को कृषि विभाग के द्वारा सलाह देकर खड़ा किया जा रहा है जो कि मटर उत्पादन की उन्नत तकनीक उत्कृष्ट आदान सामग्री एवं प्रसंस्करण के लिये काम करने की कार्य योजना प्रस्तावित है।

मटर सब्जी के अंतर्गत आने वाली हरी गीली फसल होती है अत: इसके भण्डारण के लिये कोल्ड स्टोरेज की आवश्यकता महसूस की जा रही है। एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फण्ड के अंतर्गत जिले में जिला प्रशासन, कृषि उद्यानिकी, उद्योग विभाग एवं नाबार्ड की सहायता से किसानों के लिये कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने का मार्गदर्शन दिया जा रहा है। साथ ही साथ निजी प्रसंस्करण इकाईयों की स्थापना की भी कार्य योजना है।

मटर कार्यशाला में उत्कृष्ट मटर उत्पादक किसानों का शॉल-श्रीफल एवं प्रमाण पत्र देकर अनुविभागीय कृषि अधिकारी डॉ. इंदिरा त्रिपाठी के द्वारा सम्मान किया गया एवं मटर प्रक्षेत्र का फील्ड भ्रमण भी आयोजित किया गया। किसानों को अलग-अलग समय में मटर की बोनी करने की तकनीक व आदानों की जानकारी देते हुये यह भी बताया गया कि कम रासायनिक साधनों की सहायता से यदि मटर उत्पादन किया जायेगा तो इसकी फल्ली अधिक समय तक ताजी रहेगी एवं उनका स्वाद भी उत्तम रहेगा।

कार्यशाला में जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नितिन सिंघई एवं डॉ. यतींद्र खरे द्वारा तकनीकी जानकारी दी गई। कार्यक्रम में राष्ट्रीय बीज निगम, कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी रजनीश दुबे ने किया।