इफी 2018 में गैर-फीचर फिल्मों के निर्देशकों ने प्रेस से मुलाकात की

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गोवा में हो रहे 49वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के गैर-फीचर फिल्म वर्ग में दिखाई गई फिल्म ‘द वर्ल्ड्स मोस्ट फेमस टाइगर’ के डायरेक्टर और जाने-माने सिनेमैटोग्राफर श्री एस. नल्ला मुथु ने कहा कि एक ऐसे देश में जहां मुश्किल से ही कोई पर्यावरण से जुड़े विषयों वाली फिल्मों पर निवेश करता है, वहां गुणवत्ता भरी फिल्में निर्मित करने के लिए खुद धन जुटाना सबसे श्रेष्ठ विकल्प है। वे’मॉनिटर’, ‘मिडनाइट रन’ और ‘ना बोले वो हराम’ जैसी गैर-फीचर श्रेणी की फिल्मों के निर्देशकों के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे।

अपनी फिल्म ‘द वर्ल्ड्स मोस्ट फेमस टाइगर’ के बारे में बात करते हुए श्री नल्ला मुथु ने कहा कि ये फिल्म संरक्षणवादियों, जीवविज्ञानियों या वन्यजीवों के बारे में जानने वाले लोगों के लिए नहीं है। ये फिल्म आम दर्शकों के लिए बनाई गई है और जानवरों का चित्रण करते और उन्हें मानवीय बनाते हुए इसकी कहानी भारतीय परिपेक्ष्य से कही गई है।

उन्होंने इशारा किया कि चूंकि भारत में पर्यावरण विषयक परियोजनाओं के लिए कोई समर्पित चैनल या कोई चैनल स्लॉट नहीं है, ऐसे में हमें नेशनल जियोग्राफिक और डिस्कवरी जैसे चैनलों पर निर्भर रहना पड़ता है जहां गुणवत्ता भरे उत्पाद की मांग रहती है। ‘द वर्ल्ड्स मोस्ट फेमस टाइगर’ दरअसल रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान की दिग्गज शेरनी मछली के दृढ़ निश्चय, साहस और आत्मविश्वास को दिखाती है। मानव-पशु संघर्ष पर एक सवाल का जवाब देते हुए श्री मुथु ने कहा कि आगे बढ़ना है तो सह-अस्तित्व ही एकमात्र विकल्प है।

गैर-फीचर फिल्म ‘मॉनिटर’ के निर्देशक श्री हरि विश्वनाथ ने कहा कि उनकी फिल्म का इरादा महिलाओं को प्रोत्साहित करना है कि वे कार्यक्षेत्र में यौन उत्पीड़न के खिलाफ उठ खड़ी हों। ये पूरी फिल्म एक कंप्यूटर मॉनिटर के दृष्टिकोण से दिखाई गई है। सच्ची घटनाओं पर आधारित ‘मॉनिटर’ एक सूचना प्रोद्यौगिकी पेशेवर रूपा की जिंदगी की कहानी सुनाती है जो कार्य के बुरे माहौल में अपने करियर और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाने के लिए संघर्ष कर रही है।

उन्होंने कहा, “ये एक काल्पनिक फिल्म है जो मेरी एक दोस्त की सच्ची कहानी पर आधारित है जिसके साथ बलात्कार किया गया था। मैंने ये फिल्म इसलिए बनाई ताकि ऐसी घटनाओं का साहस से सामना करने के लिए दूसरी महिलाओं को प्रेरित कर सकूं।” उन्होंने कहा कि सिर्फ कार्यक्षेत्र में यौन उत्पीड़न के साथ जुड़ी समस्याओं को दिखाने के बजाय हमें कुछ प्रेरक और प्रोत्साहित करने वाले उपायों को सामने लाना चाहिए।

‘मिडनाइट रन’ की निर्देशिका सुश्री रेम्या राज ने कहा कि उनकी ये पहली ही फिल्म है और ये कोशिश है एक व्यक्ति में भय के परिवर्तन को चित्रित करने की। ये फिल्म उस सार्वभौमिक भाव की क्षमता को दिखाती है जो लोगों में संपूर्ण कायापलट उत्प्रेरित कर सकता है जब वे भयभीत होते हैं और जब कोई उन्होंने डराने की कोशिश कर रहा होता है।

‘ना बोले वो हराम’ फिल्म के निर्देशक श्री नितिश पाटणकर ने बताया कि कैसे पेशावर के स्कूल में हुए आतंकी हमले की एक खबर ने उन्हें इसे बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद और सभी बुरी चीजों के बीच एक समान कड़ी होती है।

उन्होंने कहा, “चाहे जाति हो, धर्म हो या भगवान हो, लोग अपने खुद के स्वार्थ पूरे करने के लिए किसी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इस फिल्म को एक सरल ढंग से कहा गया है जिसमें धर्म को पृष्ठभूमि और दो बच्चों को मानव स्वभाव के प्रतीकों के तौर पर इस्तेमाल किया गया है।”

‘द वर्ल्ड्स मोस्ट फेमस टाइगर’ एक अंग्रेजी भाषा की वन्यजीव डॉक्यूमेंट्री है जिसका निर्देशन श्री एस. नल्ला मुथु ने किया है। नल्ला मुथु एक सिनेमैटोग्राफर और निर्देशक हैं जो ‘टाइगर क्वीन’, ‘म्यूटेंट प्लैनेट’ और ‘टाइगर्स रिवेंज’ जैसी अपनी डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने 2015 में हुए 62वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की गैर-फीचर फिल्म श्रेणी में ‘इंडियाज़ वेस्टर्न घाट्स’ के लिए बेस्ट एक्सप्लोरेशन/एडवेंचर फिल्म लाइफ फोर्स पुरस्कार भी जीता है।

‘मॉनिटर’ एक लघु फिल्म है जिसका निर्देशन श्री हरि विश्वनाथ ने किया है। ये फिल्म एक सूचना प्रोद्यौगिकी पेशेवर रूपा की जिंदगी के बारे में है जो काम के एक बुरे माहौल में अपने पेशे और निजी जीवन के बीच संतुलन बैठाने के लिए संघर्ष कर रही है। हरि विश्वनाथ फिल्म निर्देशक, निर्माता और पटकथा लेखक हैं जो गोवा में हुए भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2017 के इंडियन पैनोरमा वर्ग के ज्यूरी पैनल में भी थे। उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीते हैं।

‘मिडनाइट रन’ का निर्देशन सुश्री रेम्या राज ने किया है। ये फिल्म एक यथार्थवादी थ्रिलर है जो भय के बारे में है और इस भाव के कई पहलू दिखाती है। इस फिल्म में एक 14 साल के लड़के और एक 40साल के ट्रक चालक के किरदार हैं। ये फिल्म भय की वो क्षमता दिखाती है कि कैसे ये भाव लोगों में संपूर्ण परिवर्तन उत्प्रेरित कर देता है जब वो डरे हुए होते हैं या जब कोई उनको डराने की कोशिश कर रहा होता है।

रेम्या राज एक दृश्य संचार स्नातक हैं और ये फिल्म रेम्या को फीचर फिल्में बनाने के अंतिम लक्ष्य की ओर आगे ले जाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है। इस फिल्म को कोच्ची में रातों के दौरान न्यूनतम संगीत के साथ फिल्माया गया है। इस फिल्म में दो बार के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता निर्देशक दिलीश पोथान और गप्पी फिल्म के लिए चर्चित व राज्य पुरस्कार विजेता चेथन जयलाल ने प्रमुख भूमिकाएं की हैं। इस फिल्म का प्रदर्शन इस साल हंगरी फिल्म महोत्सव में भी किया गया था।

‘ना बोले वो हराम’ बतौर निर्देशक नितिश पाटणकर की पहली फिल्म है। ये एक काल्पनिक लघु कथा पर आधारित है जिसे आदित्य भगत ने लिखा है। पाटणकर ने ‘रूह हमारी’ नाम से एक नाटक का निर्देशन भी किया है।