न बोनस न उचित समर्थन मूल्य’ : कांग्रेस अध्यक्ष अरूण यादव

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भोपाल @ एक ओर सरकार ने  सरसो,चना और मसूर  को भावांतर की जगह न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने का फैसला लिया है इसके साथ दूसरी तरफ कांग्रेस किसानों की मदद के लिए मंडी में होने वाली खरीदी में किसान जन सहायता सेवा केंद्र खोलने की बात कर रही है।

यादव ने गेहूं खरीदी केंद्रों पर कांग्रेस द्वारा लगाये गये ‘किसान जन सहायता सेवा केंद्र’ के सदस्यों से कहा कि वे मंड़ी में अधिकारियों द्वारा किसानों की फसल की तौल में हो रही धांधली, भ्रष्टाचार, अवैध वसूली, अच्छे गेहूं को अमानक बताये जाने पर रोक लगवाने में सहयोग करें।

मुख्यमंत्री से बकाया 600 रू. प्रति क्विंटल बोनस राशि की भी मांग करें। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी किसानों की हमेशा से सहयोगी रही, उनके साथ खड़ी होकर उनके हक की लड़ाई लड़ने में भी निरंतर संघर्ष करती रही है। चुनावी वर्ष में 200 रुपए के बोनस की एक बार फिर झूठी घोषणा इस सरकार ने किसानों से की है।

मंडी और सोसायटियों में खरीदी प्रारंभ हो गई है, किंतु सरकार ने बोनस दिये जाने की कोई योजना नहीं बनाई है। वहीं विक्रय केंद्रों पर किसानों के लिए स्वच्छ जल, धूप से बचने हेतु टीन शेड की की समुचित व्यवस्था की जानी चाहिए। वहीं अरूण यादव ने प्रदेश के किसानों के हक की लड़ाई में सहयोग देने हेतु समर्थन मूल्य के अंतर्गत गेहूं खरीदी केंद्रों पर जिला,ब्लॉक स्तर पर कांग्रेस पार्टी के बैनर के साथ ‘किसान जन सहायता सेवा केंद्र खोलने’ के निर्देश दिये हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष अरूण यादव ने आरोप लगातेहुए कहा कि आपदा से जूझ रहे किसानों के लिए समर्थन मूल्य काफी कम है। वहीं घोषणा के बाद तीन साल से किसानों को बोनस भी नहीं दिया जा रहा है। प्रदेश का अन्नदाता किसान फिलहाल काफी आर्थिक और मानसिक संकट के दौर से गुजर रहा है।

सूखा, ओला, अतिवृष्टि से बड़े पैमाने पर उनकी फसलें बर्बाद हुई हैं और केंद्र एवं प्रदेश की किसान विरोधी भाजपा सरकार किसानों की इस विपदा के समय उनके जले पर नमक छिड़कने का कार्य कर रही हैं। अरूण यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा किसानों की रबी फसल की खरीदी 26 मार्च से शुरू की जा रही है, जिसका समर्थन मूल्य 1735 रुपए घोषित किया गया है।

3 सालों से आपदा और कठिनाई से जूझ रहे किसानों के लिए यह राशि बहुत ही कम है। अरूण यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री बनते ही नरेन्द्र मोदी के निर्देश के बावजूद प्रदेश सरकार ने पिछले तीन सालों से गेहूं पर बोनस का भुगतान नहीं किया गया है।